चंबा। विकास खंड सलूणी के खैरना और चुंडी जंगल में पिछले पांच सालों में टीडी के नाम पर स्वीकृत देवदार के पेड़ों का गलत कटान हुआ है। इसको लेकर प्रारंभिक जांच करते हुए वन विभाग ने अपने आठ कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिए हैं। इसमें दो डिप्टी रेंजर, दो वन खंड अधिकारी और चार वन रक्षक शामिल हैं। इन्होंने अपने परिक्षेत्र में टीडी के तहत स्वीकृत हुए देवदार और कायल के पेड़ों की सही निशानदेही नहीं की। इसकी वजह से गलत पेड़ों को काटा गया। इसका खुलासा तब हुआ, जब जंगल में अवैध कटान को लेकर गुमनाम शिकायत वन विभाग के पास पहुंची। वन मंडल अधिकारी ने इस गुमनाम शिकायत के आधार पर कटान की जांच करने के लिए वन परिक्षेत्र अधिकारी की अगुवाई में जांच टीम का गठन किया और टीम को पूरे जंगल का औचक निरीक्षण करके कटान की जांच करने के निर्देश दिए। जांच के दौरान वनमंडल अधिकारी स्वयं भी जंगल को खंगालते हुए नजर आए। इस दौरान 135 पेड़ों के ठूंठ मिले जिन्हें टीडी के तहत काटा गया है जबकि टीडी के तहत काटने को लेकर अन्य पेड़ों को स्वीकृत किया गया था। इसमें वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। इससे विभाग को कितना नुकसान हुआ है इसको लेकर भी आकलन तैयार किया जा रहा है। इसके चलते आठ कर्मचारियों को नोटिस भी जारी हो चुके हैं। वर्ष 2018-19 से लेकर 2022 तक वन निगम को 8,000 पेड़ों को काटने का कार्य आवंटित हुआ है। कुछ लॉटों में निगम की तरफ से पेड़ों को काटने का कार्य अभी तक चल रहा है। ऐसे में इन लॉटों में कहीं गलत पेड़ों का कटान न हुआ हो, इसको लेकर भी वन विभाग अपने स्तर पर जांच कर रहा है। इसके लिए सभी लॉटों की जांच की जा रही है। वन विभाग ने देवदार के पेड़ों के कटान में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर भी शिकंजा कस दिया है।
गुमनाम शिकायत के आधार पर अवैध कटान की जांच करने के लिए डीएफओ फ्लाइंग स्क्वायड धर्मशाला भी जांच के लिए सलूणी पहुंचे हैं जो जंगल में जाकर कटान को लेकर जांच कर रहे हैं। उनकी जांच पूरी होने के बाद वन विभाग अपनी जांच को आगे बढ़ाएगा।
गुमनाम शिकायत के आधार पर जब जंगलों में अवैध कटान की प्रारंभिक जांच की गई तो इसमें टीडी के तहत पेड़ों की गलत निशानदेही सामने आई है। इसमें पेड़ों के ठूंठ भी बरामद हुए हैं। इसमें संबंधित वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। इसको लेकर कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। टीडी के तहत स्वीकृत पेड़ों के बजाय अन्य पेड़ों को काट दिया गया है।
सुशील गुलेरिया, वनमंडल अधिकारी चुराह।