चंबा। सपनों को पूरा करने के लिए अगर परिवार का सहयोग मिल जाए तो हौसलों की उड़ान को कोई नहीं रोक सकता है। चंबा शहर के चरपट मोहल्ले की रहने वाली मेघा ने भी परिवार के दम पर चित्रकला में हौसलों की उड़ान भरी है। मेघा ने बचपन में मां विमल गुप्ता को देखकर चित्रकला सीखी, जिसे पति के साथ ने पंख लगा दिए।
मेघा बताती हैं कि जब वह छोटी थीं, तब मां घर के काम निपटाने के बाद कागज पर आकृतियां उकेरती थीं। वही पल उनके लिए प्रेरणा बन गए। मां से मिली यह कला विरासत में ही नहीं, संस्कार में भी बस गई। पिता अश्वनी गुप्ता ने भी बेटी के शौक को कभी नजरअंदाज नहीं किया बल्कि हर कदम पर हौसला बढ़ाया।
समय के साथ शौक जुनून में बदला। आज मेघा राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, मां सरस्वती सहित धार्मिक और आधुनिक डिजाइन की हूबहू पेंटिंग कुछ ही मिनटों में तैयार कर लेती हैं। वर्ष 2024 में शादी के बाद कुछ समय के लिए उनका यह सफर थम जरूर गया, लेकिन पति नीरव ने उन्हें दोबारा ब्रश थामने के लिए प्रेरित किया।
मेघा कहती हैं कि शादी उनके लिए रुकावट नहीं बल्कि सहारा बनी। मेघा को सास सुमन महाजन और ससुर दिनेश महाजन का भी पूरा सहयोग मिला। एक बेटी की मां होने के बावजूद उन्होंने घर और कला दोनों को संतुलित किया। 10 वर्षों से वह पेंटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनकी बनाई पेंटिंग्स को म्यूजियम में भी स्थान मिल चुका है।
फिलहाल मेघा पेंटिंग के साथ-साथ फैशन डिजाइनिंग का काम भी कर रही हैं। उनका सपना है कि वह मेलों और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर अपनी कला को लोगों तक पहुंचाए। मेघा का कहना है कि अगर मां की सीख और परिवार का साथ मिल जाए तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। मेघा की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो मां से मिली कला को अपनाकर अपने सपनों को नई उड़ान देना चाहती हैं।