चंबा। औषधीय पौधों की खेती में नई तकनीक के प्रयोग और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के लिए धरवास पंचायत में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हुआ। इसमें क्षेत्र के लगभग 65 किसानों ने भाग लिया। यह शिविर रीजनल कम फैसिलिटेशन सेंटर (आरसीएफसी) जोगिंद्रनगर द्वारा हिमालय उन्नति मिशन के सहयोग से किया गया।
शिविर का शुभारंभ करते हुए पंचायत प्रधान अनीता ठाकुर ने किसानों को इसका लाभ उठाने का आह्वान किया। इसके बाद प्राकृतिक खेती पर विशेषज्ञ पाली ने टिकाऊ खेती के महत्व पर जोर देते हुए प्राकृतिक खेती की विधियों से की जानकारी दी। इससे न केवल खेती की गुणवत्ता में सुधार होता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
शिविर में वन मंडल पांगी के ब्लॉक अधिकारी संजीव शर्मा ने औषधीय पौधों के निर्यात और आयात से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के महत्व और विभिन्न प्रक्रिया संबंधी जानकारी दी। विपणन विशेषज्ञ अभिनव बैंस ने औषधीय पौधों के बाजार में मौजूद अपार संभावनाओं पर चर्चा की।
शिविर में डॉ. श्वेता ने जैविक खेती, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (जीएपी) और गुड फील्ड कलेक्शन प्रैक्टिसेज (जीएफसीपी) पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। उन्होंने स्थानीय प्रजातियों के सतत संरक्षण और वनों से पौधों के सुरक्षित संग्रहण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया, ताकि जैविक विविधता का संतुलन बनाए रखा जा सके और भविष्य की पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके। प्रशिक्षण के समापन पर सभी किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ये जानकारी आर्ट ऑफ लिविंग चंबा के मीडिया प्रभारी मनुज शर्मा ने दी।