चंबा। जिले में विद्यार्थियों की कम संख्या वाले सरकारी स्कूलों में जरूरत से ज्यादा अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं तो वहीं कई ऐसे स्कूल हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और वहां एक ही अध्यापक सेवाएं दे रहा है।
शिक्षा विभाग और शिक्षा नीति के छात्र-अध्यापक अनुपात से स्कूलों में व्यवस्था बिगड़ी हुई है। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक स्कूलों के लिए सरकार की ओर से बनाई गई शिक्षा नीति के तहत एक केंद्रीय मुख्य शिक्षक और दो जेबीटी अध्यापकों की तैनाती की जाती है लेकिन इसके लिए बच्चों की संख्या का निर्धारण नहीं किया गया है। ऐसे में छह विद्यार्थियों वाले स्कूलों में भी केंद्रीय मुख्य शिक्षकों सहित दो जेबीटी अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा कई राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी भी हैं जहां बच्चों की संख्या कम होने के बावजूद दो-दो जेबीटी अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं। इससे अध्यापकों की मौज लगी हुई है और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ। कई स्कूलों में बिना अध्यापकों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिले के शिक्षा खंड गरोला के तहत राजकीय केंद्रीय प्राथमिक स्कूल लूणा में इसी तरह के हालात बने हुए हैं। इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या छह है लेकिन स्कूल में केंद्रीय मुख्य शिक्षक और दो जेबीटी अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं। वहीं शिक्षा खंड के तहत आते दो अन्य प्राइमरी स्कूल डेपुटेशन पर चल रहे हैं और करीब 25 स्कूलों में एक-एक अध्यापक सेवाएं दे रहा है। जहां एक-एक शिक्षक तैनात है, उनमें कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी ज्यादा है। इन स्कूलों में दूसरे अध्यापक की तैनाती नहीं हो पा रही है जबकि केंद्रीय प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की कम संख्या के बावजूद तीन-तीन अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं।
कुल मिलाकर यह व्यवस्था खासकर उन स्कूलों पर भारी पड़ रही जहां अध्यापक नहीं हैं या फिर बच्चों की संख्या अधिक है। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी गरोला संजय कुमार का कहना है कि ब्लॉक के तहत 25 स्कूलों में एक-एक अध्यापक सेवाएं दे रहे हैं जबकि दो स्कूल डेपुुटेशन पर चल रहे हैं। कहा कि लूणा केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला में सीएचटी सहित दो जेबीटी अध्यापक तैनात हैं जो नीति के तहत तैनात किए गए हैं।