चंबा मेडिकल कॉलेज परिसर में 15 वर्ष की मियाद के बाद बंद की गई गाड़ियों के तहत खड़ी की गई एंबुले
चंबा। जिले की कोई संस्था रक्तदान शिविर लगाना चाहती है तो पहले वाहन का इंतजाम कर ले। शिविर तक उपकरण और कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए ब्लड बैंक के पास अपनी गाड़ी नहीं है। अस्पताल प्रबंधन के पास मौजूद 15 साल पुराने तीन छोटे वाहनों को भी सड़क से हटा लिया गया है।
हालांकि, रेडक्रॉस सोसायटी विभागीय रक्तदान शिविरों के लिए ही अपने वाहन भेज रही है। ऐसे में स्वेच्छा से रक्तदान शिविर लगाने वाली संस्थाओं के लिए ब्लड बैंक के बजाय अन्य जगह शिविर लगाना महंगा साबित होने वाला है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में रोजाना विभिन्न हादसों में घायल होने वाले मरीज, ऑपरेशन करवाने वाले लोग और महिलाओं संबंधी मामले पहुंचते हैं। ब्लड बैक में रखा गया रक्त इन मरीजों का जीवन बचाने में काम आता है। कई बार स्वयंसेवी स्वेच्छा से ब्लड बैंक चंबा में पहुंचकर रक्तदान करते हैं। इसे मरीजों के लिए ब्लड बैंक में संग्रहीत किया जाता है।
प्रबुद्ध जनों में पीसी ओबराय, डॉ. डीके सोनी, कश्मीरी लाल, किशोर शर्मा, शादी लाल शर्मा और अशोक कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को ब्लड बैंक के कर्मचारियों, उपकरण आदि लाने और ले जाने के लिए गाड़ी मुहैया करवानी चाहिए, जिससे जनसहभागिता के तहत होने वाले रक्तदान शिविरों में अधिक रक्त एकत्रित कर मरीजों को उपलब्ध करवाया जा सके।
सीएमओ डॉ. विपिन शर्मा ने बताया कि ब्लड बैंक के पास अपना वाहन नहीं हैं। रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से आयोजित होने वाले शिविर के लिए वे ही वाहन उपलब्ध करवाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के तीन वाहनों को 15 वर्ष पुराना होने के नियम के तहत सड़क से हटा लिया गया है। इस बारे में स्वास्थ्य निदेशक को भी सूचित करवा दिया गया है।