जिले के करीब 300 में से 50 होटल पूरा नहीं करते हैं सुरक्षा मानकों को
गलियों के बीच होटलों में आपदा में नहीं पहुंचेंगी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां
गर्मी और सर्दियों में रहती पर्यटकों की आवाजाही, पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जहां हर साल हजारों पर्यटक राहत और सुकून की तलाश में पहुंचते हैं, वहीं चंबा के कई होटल सुरक्षा मानकों की परीक्षा में फेल नजर आते हैं।
संकरी गलियों में स्थित इन होटलों तक आपातकालीन सेवाओं की पहुंच सीमित है जिससे किसी भी हादसे की स्थिति में हालात बेकाबू हो सकते हैं।
जिले की गलियों में होटलों में आपदा के समय नुकसान कम होने के बजाय बढ़ सकता है। गली-मोहल्लों में होटल संचालित होने के चलते फायर बिग्रेड की गाड़ियां पहुंचाना चुनौतियों भरा है। पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से राहत पाने और सर्दियों में बर्फबारी का आनंद लेने हर साल हजारों पर्यटक मंडी जिला का रुख करते हैं लेकिन जिन होटलों में वे ठहरते हैं, उनमें से बड़ी संख्या में आग जैसी घटनाओं से निपटने के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। करीब 50 होटल फायर सेफ्टी के अनिवार्य मानकों को पूरा नहीं करते हैं। किसी होटल में बड़ी घटना हो जाए तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगने से कई लोगों की मौत की घटना ने होटल सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। जिले की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां पर्यटन विभाग के पास करीब 300 होटल पंजीकृत हैं जहां सुरक्षा मानकों की कमी है। अधिकतर होटलों के स्टोर रूम, डाइनिंग एरिया और स्टाफ रूम में स्मोक डिटेक्टर तथा फायर अलार्म जैसी अनिवार्य सुविधाएं भी नहीं हैं। जिला चंबा के खज्जियार, डलहौजी, बनीखेत, भटियात, भरमौर सहित, जिला मुख्यालय में होटलों में फायर एक्सटिंग्विशर तो लगे हैं, लेकिन आपदा की स्थिति में जरूरी अन्य व्यवस्थाएं बिल्कुल भी नहीं है। होटलों के पास पानी भंडारण की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल का कहना है कि जिला में काफी पर्यटक आते है। इसलिए नियमित तौर पर संबंधित विभागों को निरीक्षण के आदेश समय समय पर दिए जाते है। कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी और बेहतर व्यवस्था के आदेश दिए जाएंगे।