एचआरटीसी कर्मियों की हड़ताल के चलते चंबा जिला में एचआरटीसी की बसों के पहिये जाम रहे। जिसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला में कई ऐसे रूट भी हैं जहां पर सिर्फ निगम की बसें ही चलती हैं।
ऐसे में एचआरटीसी कर्मियों के हड़ताल पर जाने से वहां पर लोगों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिल सका। यात्रियों को टैक्सी करके या पैदल ही अपनी यात्रा पूर्ण करनी पड़ी। इसके अलावा कई स्थानों पर एचआरटीसी की बसें नहीं चलने से निजी बस ऑपरेटरों की चांदी रही। निजी बसों में ठूंस-ठूंस कर सवारियां ढोई गई। एचआरटीसी कर्मियों ने हड़ताल के दौरान एचआरटीसी वर्कशॉप में जमकर धरना प्रदर्शन किया। साथ परिवहन मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।
संयुक्त समन्वय समिति इकाई चंबा के अध्यक्ष सरवन कुुमार ने एचआरटीसी कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिवहन मंत्री द्वारा एचआरटीसी कर्मियों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुबंध के आधार पर रखे जाने वाले कर्मियों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।मंत्री व विधायकों के वेतन को बढ़ाकर लाखों में किया जा रहा है। अनुबंध कर्मियों को सरकार द्वारा जो वेतन दिया जा रहा है उसमें उनके परिवार का भरण पोषण बड़ी मुश्किल से हो रहा है। इसके अलावा एचआरटीसी की नई बसों में चालक परिचालकों के सोने के लिए सीट की व्यवस्था नहीं की गई है। जिसके कारण चालक व परिचालकों को रात्रि ठहराव पर बस की छत पर अपनी रात गुजारनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में निगम के किसी कर्मी की मौत होती है तो उसके परिवार के एक सदस्य को निगम में नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री द्वारा बयान दिया जा रहा है कि कर्मचारियों की 90 प्रतिशत शर्तें मान ली गई हैं लेकिन असलियत में ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम को रोडवेज बनाया जाए ताकि कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार द्वारा उनकी सभी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।