चंबा। कड़ाके की ठंड में भी एचआरटीसी चंबा डिपो के चालक खंडहर रेस्ट रूम में रात बिताने को मजबूर हैं। लंबे सफर के बाद चालक जब रेस्ट रूम पहुंचते हैं तो उन्हें न बिजली, न बिस्तर और न गद्दे मिलते हैं। ठिठुरते हुए फर्श पर ही रात गुजारनी पड़ती है। चालकों का कहना है कि रेस्ट रूम की हालत पिछले कई सालों से खराब है लेकिन मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। रेस्ट रूम का मतलब आराम और नींद होना चाहिए लेकिन कई बार हमें किराये के कमरे लेने पड़ते हैं। हमारी मुश्किलें कभी खत्म नहीं होतीं।
बता दें कि रेस्ट रूम लंबे समय से खस्ताहाल है। अधिकारी केवल कागजों में सुधार का दावा करते हैं जबकि वास्तविकता में हालत बदतर बनी हुई है। चालकों में हेम राज, ओम शंकर, रवि कुमार, दीपक कुमार, सन्नी कुमार, किशोरी लाल, बिहारी लाल ने बताया कि लंबे सफर के बाद जब शरीर थक जाता है तो थोड़ी नींद भी जरूरी होती है। इस हालात में थकान नहीं मिटा पाते हैं, ठंड और असुविधा से जूझते रहते हैं। ऐसे रेस्ट रूम न केवल कर्मचारियों की सेहत पर असर डालते हैं बल्कि उनकी कामकाजी क्षमता को भी प्रभावित करते हैं। इसकी मरम्मत के लिए कई बैठकें और प्रस्ताव दे चुके हैं लेकिन समाधान आज दिन तक नहीं हुआ है। अब मजबूरी में चालकों ने तीन से चार हजार तक किराये पर कमरे लिए है, जहां वह अपनी नींद पूरी करते हैं। निगम की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह का कहना है कि मामला ध्यान में लाया गया है। इस बारे उच्चाधिकारी को अवगत करवाया गया है। जल्द ही रेस्ट रूम की मरम्मत करवाई जाएगी।