फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chamba News: गृहकर ने उड़ाई नींद, आसमान पर शहर के बाशिंदों का गुस्सा

Thu, 26 Feb 2026 10:27 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
विज्ञापन
विज्ञापन
बोले - नए मूल्यांकन के बाद बीस हजार से बढ़कर एक लाख रुपये से भी अधिक पहुंची राशि
विज्ञापन

जीवन भर की कमाई से बनाए आशियाने, लगता है संपत्ति पर अब नगर परिषद का हो गया हक
न स्पष्ट गणना बताने और न ही आपत्ति दर्ज करवाने की पर्याप्त प्रक्रिया समझाने का लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। नगर परिषद के नए मूल्यांकन के बाद चंबा के शहरवासियों का घर अब भारी बोझ बन गया है। महज 15 दिन के भीतर भुगतान की अनिवार्यता ने नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया है। नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है।
नए मूल्यांकन के बाद हाउस टैक्स की राशि बीस हजार से बढ़कर सीधे एक लाख रुपये से भी अधिक पहुंच गई है। इससे शहरवासी अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। अचानक हुई इस बढ़ोतरी और महज 15 दिन के भीतर भुगतान की अनिवार्यता ने मकान मालिकों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। हांलाकि, बीते दिनों शहरवासियों ने नगर परिषद कार्यालय के बाहर हंगामा भी किया था और डीसी को भी ज्ञापन सौंपा है। शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए लेकिन अब नगर परिषद के नए आकलन के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे संपत्ति पर उनका अधिकार कम और कर का बोझ ज्यादा हो गया हो। कई मध्यमवर्गीय और सेवानिवृत्त परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर रही है। नागरिकों का आरोप है कि न तो स्पष्ट गणना बताई गई और न ही आपत्ति दर्ज करवाने की पर्याप्त प्रक्रिया समझाई गई। नगर परिषद का दावा है कि निदेशालय की टीम की ओर से स्क्वायर मीटर के हिसाब से सर्वे किया गया। जिनका मकान बड़ा, उन्हें अधिक गृहकर आ रहा है। जिनका मकान छोटा है, उन्हें पांच सौ से एक हजार तक गृहकर देना होगा।
विज्ञापन

नगर परिषद की कनिष्ठ अभियंता नीतिका ठाकुर ने कहा कि वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय आने के बाद उनसे इस बारे चर्चा की जाएगी। उसके बाद ही समस्या का समाधान किया जा सकता है।

घर बनाने में पूरी उम्र की कमाई लग जाती है। अब अचानक लाखों का टैक्स थमा दिया गया। घर हमारा, पैसा हमारा लेकिन अधिकार जैसे नगर परिषद का हो गया है। - जितेंद्र पाल सिंह, शहरवासी

पहले जो टैक्स कुछ हजार में निपट जाता था, अब कई गुना बढ़ गया है। 15 दिन में जमा करने की शर्त ने रातों की नींद छीन ली है। यह हाउस टैक्स ही बंद होना चाहिए। - रविंद्र सिंह किश्तवाड़िया, शहरवासी

बिना स्पष्ट आधार बताए टैक्स बढ़ाना सरासर अन्याय है। अगर यही स्थिति रही तो मध्यम वर्ग टूट जाएगा। सरकार को हाउस टैक्स लेना बंद करना पड़ेगा। - नरेंद्र शर्मा, शहरवासी
विज्ञापन


पेंशन से घर चलता है। इतनी बड़ी रकम कम समय में जुटाना असंभव है। यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन भी किया जाएगा। - सुरेंद्र सिंह, शहरवासी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें