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Chamba News: निरंतर धंस रहा हाईवे, अब फिर मंडराया खतरा

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बग्गा से लोथल तक सफर खतरे से खाली नहीं
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पिछली बरसात में भी रावी में समा चुके हैं हाईवे के किनारे
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चंबा-भरमौर हाईवे पर बग्गा से लोथल तक सफर खतरे से खाली नहीं है। हाईवे विभिन्न स्थानों से निरंतर धंस रहा है। हैरत की बात तो ये है कि बीती बरसात के दिनों में मूसलाधार बारिश के चलते राख और बग्गा से लेकर गैहरा तक हाईवे के किनारे पर लगे स्टील के क्रैश बैरियर और डंगे रावी नदी में समा चुके हैं। अब तक बग्गा से लेकर लोथल तक हाईवे की सुध लेना भी हाईवे प्रबंधन ने मुनासिब नहीं समझा है। इतना ही नहीं, इस हाईवे का छोर निरंतर धंस कर रावी नदी में समा रहा है। ऐसे में अब यदि मूसलाधार बारिश का क्रम जारी रहता है तो हाईवे पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ने से विधानसभा क्षेत्र भरमौर का जिला मुख्यालय समेत शेष विश्व से संपर्क पूरी तरह से कट सकता है। वहीं, हाईवे प्रबंधन के अधिकारी अपने स्तर पर एस्टीमेट, प्रस्ताव और डीपीआर बनाकर स्वीकृति के लिए सरकार को भेजने और उसकी स्वीकृति न मिलने की बात कह कर अपनी बात रख रहे हैं। लिहाजा, प्रस्तावों और डीपीआर को अनुमति न मिलने की सूरत में प्रबंधन भी कार्यों को शुरू करवाने में स्वयं को लाचार महसूस कर रहा है।
हाईवे पर बग्गा से लोथल तीन किलोमीटर बीती बरसात में बहने के बाद से लेकर अब तक कुछ भी इंतजाम नहीं हो पाए हैं। प्रबंधन की ओर से बाकायदा अपने स्तर पर राख और आसपास की जगहों पर रिवर बेड का निर्माण करवाकर कुछ अदद राहत वाहन चालकों को तो दी गई है लेकिन, इससे आगे खड़ामुख तक हाईवे पर धरवाला, चूड़ी और लोथल में हालात खस्ता हो चुके हैं कि इसे देखकर ये प्रतीत करना मुश्किल हो जाता है कि यहां पर हाईवे है या मवेशियों के चलने योग्य रास्ता है। ग्रामीणों संजय राजपूत, विक्रांत ठाकुर, रविंद्र कुमार, साहिल महाजन, सोनू राजपूत आदि ने बताया कि बीती बरसात के जख्म अब तक नहीं भरे गए हैं। सितंबर में पवित्र मणिमहेश यात्रा आरंभ होगी। प्रबंधन की लापरवाही अनमोल जिंदगियों पर कभी भी भारी पड़ सकती है।
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हाईवे मंडल चंबा के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि विभाग ने अपने स्तर पर सरकार को प्रस्ताव और डीपीआर बनाकर भेजी है। उसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। प्रबंधन की ओर से अपने स्तर पर कई जगह कार्य करवाकर लोगों को राहत प्रदान करने का कार्य किया है। जैसे ही प्रस्ताव और डीपीआर को स्वीकृति मिलेगी और फंड आएगा तो प्राथमिकता के आधार पर कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा।
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