एंटी हेलनेट न होने से ओलावृि@टसे टूटी सेब की टहनियां, पत्तियां। विभाग
सेब के फलों और पत्तियों पर बने जख्म, फफूंद जनित रोगों का बढ़ा खतरा
उद्यान विभाग ने दीदवाइयों के छिड़काव से फसल को बचाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। ओलों की बारिश ने जिले के सेब बागवानों की मेहनत पर ऐसा कहर बरपाया कि पौधों पर लटकते फलों और हरी पत्तियों पर जख्म साफ दिखाई दे रहे हैं।
ओलावृष्टि के बाद अब बागवानों की चिंता सिर्फ टूटे फलों तक सीमित नहीं है, बल्कि फफूंद जनित रोगों का बढ़ता खतरा उनकी आर्थिकी पर भी भारी पड़ सकता है। इसी बीच, उद्यान विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दवाइयों के छिड़काव और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से फसल को बचाने की कवायद तेज कर दी है।
हाल ही में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। जिन बगीचों में एंटी-हेलनेट्स उपलब्ध नहीं थे वहां फलों और पत्तियों पर चोट के कारण फफूंद जनित रोग बढ़ सकते हैं। एडवाइजरी में डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी की वर्ष 2026 की सिफारिशों के अनुसार बागवान ओलावृष्टि के तुरंत बाद मैंकोजेब 75 डब्ल्यूपी 600 ग्राम अथवा कार्बेन्डाजिम 100 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके 3-4 दिन बाद बोरिक एसिड 200 ग्राम, जिंक सल्फेट 500 ग्राम, क्विक लाइम 250 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का स्प्रे करें। उपनिदेशक उद्यान चंबा डॉ. प्रमोद ने बताया कि 10-12 दिन बाद सूक्ष्म पोषक तत्व 400-600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। डॉ. प्रमोद ने कहा कि समय पर फफूंदनाशी एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से फसल को आगे होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है। उद्यान विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के निर्देश जारी किए हैं।