चंबा। वन विभाग ने आग से प्रभावित जंगलों में पौधे लगाकर दोबारा हरियाली लाने की योजना बना ली है। वन मंडल चंबा के तहत 200 हेक्टेयर भूमि में करीब डेढ़ लाख पौधे रोपे जाएंगे।
पौधरोपण के लिए वन विभाग लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहा था। बारिश और बर्फबारी होने से पौधरोपण का कार्य शुरू कर दिया है। 15 मार्च से पहले सभी वन परिक्षेत्र अधिकारियों को अपने-अपने परिक्षेत्र में पौधरोपण का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वही पौधे रोपे जाएंगे, जो सर्दियों में विकसित होते हैं। इन पौधों में देवदार, बान, चौड़ी पत्ती सहित विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे शामिल हैं। फलदार पौधे इसलिए लगाए जाएंगे, जिससे वन्य जीव खाने की तलाश में रिहायशी बस्ती का रुख न करें। जिले में बारिश न होने से जंगलों में आग की घटनाएं काफी बढ़ गई थीं। इससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा था। कई जंगलों से हरियाली भी खत्म हो गई थी। इससे वहां भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया था। अब विभाग ऐसे सभी स्थानों पर पौधरोपण कर रहा है, जहां नम पड़ी मिट्टी में पौधों की जड़ों की पकड़ बनी रहे। विभाग सर्दियों में हर वर्ष पौधरोपण करता है। इस बार भी विभाग के कर्मचारी अपने-अपने परिक्षेत्रों में पौधे लगाने में जुट गए हैं।
वनमंडल अधिकारी चंबा कृतज्ञ कुमार ने बताया कि सर्दी के मौसम में होने वाले पौधरोपण की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। 15 मार्च से पहले 200 हेक्टेयर भूमि में करीब डेढ़ लाख पौधे रोपे जाएंगे। सभी वन परिक्षेत्र अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
पौधरोपण के साथ चल रहा बाड़बंदी का काम
जंगलों में पौधरोपण के साथ बाड़बंदी भी की जा रही है, जिससे वन्य जीव जंगलों से रिहायशी बस्ती में न पहुंच पाएं। साथ ही कोई व्यक्ति विभाग की अनुमति के बिना रकबों में न जा सके। बाड़बंदी से रकबे में लगाए जाने वाले पौधों को जानवरों से भी बचाया जाएगा। स्थानीय लोगों की मदद से विभाग इन कार्यों को अंजाम दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनी वन प्रबंधन समितियां यह कार्य कर रही हैं।