चंबा के 164 होटलों को नोटिस जारी होने पर उठाए सवाल, पांच साल के शुल्क में किस्तों का विकल्प देने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। सामाजिक कार्यकर्ता मनीष सरीन ने होटल कारोबारियों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को लेकर प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शुल्क व्यवस्था में राहत देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में पांच साल का सहमति शुल्क एकमुश्त जमा करवाने की व्यवस्था छोटे और मध्यम होटल संचालकों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
सरीन ने कहा कि चंबा जिले के 164 होटलों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। कारोबारियों को निर्धारित समय में जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन शुल्क जमा करवाने की प्रक्रिया कारोबारियों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए। सरकार को वार्षिक या चरणबद्ध भुगतान का विकल्प देने पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पुरानी और नई शुल्क व्यवस्था की तुलना सार्वजनिक की जाए, ताकि कारोबारियों को शुल्क निर्धारण का आधार स्पष्ट हो सके। साथ ही प्रभावित होटल संचालकों को नियमों का पालन करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और व्यावहारिक अवसर दिया जाए।
सरीन ने मुख्यमंत्री और पर्यटन विभाग से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चंबा और डलहौजी जैसे पर्यटन क्षेत्रों में होटल उद्योग से कर्मचारियों, टैक्सी चालकों, दुकानदारों और अन्य कारोबारियों की आजीविका जुड़ी है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन कारोबार के हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उन्होंने स्थानीय और प्रदेश भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह होटल कारोबारियों की समस्याओं को मुख्यमंत्री, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे।