चंबा। जिले के बागवानों को उद्यान विभाग के विशेषज्ञों ने पौधारोपण से 20 दिन पहले मिट्टी तैयार करने की सलाह दी है। बागवान शरद ऋतु में सेब, नाशपाती, अखरोट, कीवी के पौधरोपण के समय आवश्यक सावधानियां बरतें। दिसबंर से फरवरी पौधरोपण के दौरान जब तापमान मध्यम हो। मिट्टी को पौधरोपण से 15-20 दिन पहले तैयार करें। मिट्टी में जैविक खाद (गोबर की खाद, वर्मी-कम्पोस्ट) मिलाएं।
शरद ऋतु में पौधों को मजबूत जड़ों के लिए मिट्टी की जलधारण क्षमता का ध्यान रखें। पौधों के आकार के अनुसार गड्ढों का आकार दो से तीन फुट रखें। गड्ढों में खाद, मिट्टी और रेत का मिश्रण डालें। गड्ढे को कुछ दिन के लिए खुला छोड़ दें, ताकि कीट नष्ट हो जाएं। इसके अलावा रोग-मुक्त और स्वस्थ पौधों का चयन करें। पौधे को गड्ढे में सावधानीपूर्वक रोपें और मिट्टी से अच्छी तरह ढकें। ताकि, जड़ें ठीक से फैलें। उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने बताया कि पौधरोपण के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। शरद ऋतु में अधिक पानी देने से बचें, क्योंकि इस मौसम में वाष्पीकरण कम होता है। इसके अलावा गड्ढों और आसपास के क्षेत्र से खरपतवार निकाल दें।
इससे पौधों को पोषण और पानी ठीक से मिल सकेगा। क्योंकि, शरद ऋतु में मृदा और वायुमंडलीय आर्द्रता के कारण फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पौधों की नियमित जांच करें और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। रात में अधिक ठंड से बचाने के लिए पौधों को घास या प्लास्टिक शीट से ढक सकते हैं। पौधे ऐसी जगह लगाएं, जहां उन्हें पर्याप्त धूप मिल सके। अत्यधिक छाया वाले स्थानों पर पौधरोपण से बचें। पौधों को पोषण देने के लिए समय-समय पर जैविक खाद डालें।
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