बनीखेत (चंबा)। संत निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में सत्संग की अध्यक्षता महात्मा दीप जसवाल ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सतगुरु के वचनों को कर्म रूप में अपनाना ही सही मायनों में भक्ति है। सुख एवं दुख जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिनका जीवन में आना-जाना चलता ही रहता है, लेकिन भक्त जब भक्ति के रंग में होता है, तब वह हर पल आनंद का अनुभव करते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण को अपना लेता है।
महात्मा ने कहा कि शाश्वत आनंद की निरोल अवस्था को निरंतर कायम रखने के लिए प्रभु इच्छा को सर्वोपरि मानना होगा। तभी भक्ति मार्ग पर चलते हुए आनंद की अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है। जब हम इस निरंकार प्रभु - परमात्मा से जुड़ जाते हैं, तब भक्ति का एक ऐसा रंग हम पर चढ़ जाता है, जिससे सदैव ही आनंद की अनुभूति प्राप्त होती रहती है। इस आनंद में भक्त इस प्रकार से तल्लीन रहता है कि फिर किसी के बुरे शब्दों या व्यवहार का उस पर कोई प्रभाव ही नहीं पड़ता। इस अवसर पर शाखा के संयोजक महात्मा एचएस गुलेरिया ने कहा कि मिशन का मुख्य उद्देश्य सभी मनुष्यों को बिना किसी भेदभाव के ईश्वर से जोड़ना और प्रेम, करुणा और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है।