डलहौजी के ऋषभ ने बनाया मॉडल, बढ़ते जलस्तर से करेगा आगाह, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित
नी रोकने और लोगों को सुरक्षित निकालने की भी दिखाई तकनीक
पंकज सलारिया
चंबा। बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद बचाव की भागदौड़ शुरू हो, उससे पहले ही खतरे का संकेत मिल जाए। इसी सोच के साथ गुरु नानक पब्लिक स्कूल डलहौजी के छात्र ऋषभ सिंह पंवार ने ‘फ्लड रक्षक’ मॉडल तैयार किया है।
यह मॉडल बढ़ते जलस्तर से संभावित खतरे का आकलन करने, अतिरिक्त पानी को अस्थायी रूप से रोकने और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की अवधारणा पेश करता है। ऋषभ के इस नवाचार ने जिला स्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन में पहला स्थान हासिल किया है। अब मॉडल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रस्तुत किया जाएगा।
मॉडल में अल्ट्रासोनिक सेंसर और क्वार्की नियंत्रक का उपयोग किया गया है। सेंसर नदी के पानी का स्तर मापने में मदद करता है। जलस्तर बढ़ने पर संभावित खतरे का पता लगाने और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था इसकी मुख्य विशेषता है। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क होने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की तैयारी के लिए समय देना है।
पानी रोकने से लेकर सुरक्षित निकासी तक
मॉडल में जी-कैन प्रणाली के जरिये अतिरिक्त पानी को अस्थायी रूप से एकत्रित करने और परिस्थितियां अनुकूल होने पर धीरे-धीरे छोड़ने की परिकल्पना की गई है। इससे पानी के बहाव को नियंत्रित करने और निचले क्षेत्रों में संभावित नुकसान घटाने की संभावना दिखाई गई है। आपात स्थिति में लोगों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी मॉडल का हिस्सा है।
हालांकि, वास्तविक बाढ़ में इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए जल प्रवाह, भंडारण क्षमता, सेंसर की विश्वसनीयता और सुरक्षित निकासी व्यवस्था का परीक्षण आवश्यक होगा।
ऋषभ ने यह मॉडल गाइड शिक्षक मयंक शर्मा, गंगाधर वर्मा और अनुज शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार किया है। जिला स्तर पर पहला स्थान हासिल करने के बाद अब यह मॉडल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी उपयोगिता और नवीन सोच के साथ प्रस्तुत होगा।