चंबा में होली बाजार के साथ बीते दिनों हुई बरसात से हुआ भूस्खलन।संवाद
होली (चंबा)। भरमौर उपमंडल की होली तहसील मुख्यालय से सटे होली बाजार का अस्तित्व खतरे में है। इसका कारण अगस्त-सितंबर 2025 में हुई भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन है। हैरानी की बात यह है कि आपदा को पांच महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक बाजार की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्य शुरू नहीं किया गया है। यहां तक कि आपदा से हुए नुकसान की रिपोर्ट को अभी स्वीकृति भी नहीं मिली है।
बाढ़ और भूस्खलन से कई दुकानों और मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित दुकानदार राकेश कुमार, प्रवीण कुमार, अमित कुमार, नरेश कुमार सहित अन्य का कहना है कि उनकी दुकानें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। बावजूद इसके वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण वे जान जोखिम में डालकर इन्हीं जर्जर दुकानों में कारोबार करने को मजबूर हैं।
दुकानदारों का कहना है कि हल्की बारिश होने पर भी उन्हें भारी डर सताने लगता है। यदि लगातार तीन से चार दिन बारिश होती है तो दुकानें पूरी तरह गिर सकती हैं। इससे न केवल उनकी आजीविका बल्कि जान-माल का भी गंभीर खतरा बना हुआ है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित कई रिहायशी मकानों पर भी गिरने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात को सोते समय यह चिंता बनी रहती है कि सुबह सूरज देख पाएंगे या नहीं।
क्रेट वर्क नाकाफी
जीएमआर कंपनी द्वारा एक स्थान पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में क्रेट वर्क का कार्य करवाया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्य नाकाफी है। उन्होंने विभाग और सरकार से मांग की है कि बाजार की स्थायी सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में आने वाली आपदाओं से बाजार और लोगों की जान-माल सुरक्षित रह सके।
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर लगभग 16 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार कर भरमौर उपमंडल प्रशासन को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। जैसे ही आपदा मद की राशि स्वीकृत होती है, प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हेमराज, कनिष्ठ अभियंता, लोक निर्माण विभाग