चंबा। एक तो बारिश न होने से किसान परेशान हैं। अब बंदरों के उत्पात ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। ऐसे में खेतीबाड़ी पर निर्भर किसानों को अब अपने परिवार का पालन पोषण करने की चिंता सताए जा रही है। जिले के कुछ किसानों ने बिना नमी के गेहूं की बिजाई कर दी थी। इसके बाद अब बंदर खेतों में उत्पात मचा रहे हैं। बंदर खेतों में जाकर बोई गई गेहूं की फसल के बीजों को निकाल कर खा रहे हैं। खेतों में किसान दिन-रात मेहनत करते हैं, ताकि अच्छी फसल हो और परिवार का जीवन यापन हो सके। पहले ही सूखा पड़ने से किसान परेशान हैं। ऐसेे में गेहूं की बिजाई का सीजन खत्म हो रहा था।
इसके चलते कुछ किसानों ने बिजाई न करने का निर्णय लिया तो कुछ किसानों ने बिना बारिश के ही गेहूं की बिजाई कर दी है। किसानों की मानें तो इतने पैसे खर्च करके बीज खरीदते हैं। लेकिन, सूखे और बंदरों के आतंक ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। पहले गेहूं और मक्की की खेती से किसानों की अच्छी खासी आय होती थी। इसमें वह अपने परिवार के पालन-पोषण के अलावा अन्य खर्चों को पूरे करते थे। लेकिन, जिले के कुछ क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती तादाद से अब जमीन बंजर बनने तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, बंदर अब लोगों के घरों में आकर आंगन में लगी सब्जियों को भी उजाड़ने में कसर नहीं छोड़ रहे।
किसान कृष्ण पाल, दलीप कुमार, किशोरी लाल, पवन कुमार और सुशील कुमार का कहना है कि पहले यह बंदर जंगलों के साथ लगते खेतों में ही नुकसान पहुंचाते थे। अब धीरे-धीरे इलाकों में घर के आंगन में लगी सब्जियों को उजाड़ रहे हैं। भलेई, सूलणी और साहों के इलाकों में बंदरों का काफी आतंक हो गया है। इससे अच्छा पहले ही गेहूं की बिजाई नहीं करते, जिससे उनकी मेहनत पर पानी नहीं फिरता।