डीआरडीए कार्यालय में खंड विकास अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने की। बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी स्कीमों के कार्यान्वयन में यदि शुरूआती जांच में ही वित्तीय अनियमितता होने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित खंड विकास अधिकारी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाएं ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों को दंडित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि विकास की सभी स्कीमों का कार्यान्वयन इस आधार पर हो, जिससे उनमें वित्तीय अनियमितता की कोई गुंजाइश न रह सके। इसके अलावा विकास की सभी स्कीमें समय पर पूर्ण होनी चाहिए। मनरेगा को लेकर उपायुक्त ने निर्देश देते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 के दौरान मनरेगा के जिन कार्यों की एमआईएस एंट्रियां छूट गई हैं। उन्हें तीस अप्रैल तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इसमें मैटीरियल और लेबर के कंपोनेंट शामिल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनियमितता या अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में जांच तत्परता के आधार पर हो।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से कार्यान्वित योजनाओं व स्कीमों का ग्रामीण आर्थिकी के सुदृढ़ीकरण से सीधा संबंध है। जिनको लागू करने में प्रतिबद्धता, पारदर्शिता व समयबद्धता आवश्यक है। खंड विकास अधिकारी चंबा को योजनाओं के कार्यान्वयन में अव्वल आंका गया। बेहतरीन कार्यों के लिए उपायुक्त ने विकास खंड अधिकारी को टैबलेट कंप्यूटर प्रदान किया। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी शुभकरण सिंह, डीआरडीए परियोजना अधिकारी संजीत सिंह के अलावा जिला के सभी विकास खंडों के अधिकारी मौजूद रहे।