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Chamba News: कूठ से चांदी कूट रहे चांजू के किसान

Thu, 26 Dec 2024 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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कूठ की खेती
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चुराह (चंबा)। चंबा के उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत चांजू के किसान पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय पौधों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। खासतौर पर कूठ की खेती यहां के किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनी है। क्षेत्र के किसानों को इसके दाम अमृतसर की मंडी में 300 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रहे हैं। चांजू के किसान चमन लाल, लेख राज, चेत सिंह और लोभी राम ने बताया कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले कूठ की खेती से उन्हें दोगुनी आय हो रही है।
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इसके अलावा यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। कूठ की फसल एक बीघा में 11 क्विंटल तक होती है। औषधीय गुणों के कारण कूठ की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वे अब तैयार किए कूठ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। कूठ की खेती ने चांजू पंचायत के किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधार रही है, बल्कि अन्य किसानों को भी औषधीय खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

औषधीय पौधों को लगाकर किसान अच्छी आमदनी बढ़ा सकते हैं। चुराह विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले परिक्षेत्रों में कुछ किसानों द्वारा कूठ औषधीय पौधों को लेकर खेती की जा रही हैं।
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सुरेंद्र सुमन, जिला आयुष अधिकारी चंबा

क्या है कूठ, जड़ें सबसे उपयोगी
कूठ जिसे औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। कूठ की खेती ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में की जाती है। कूठ एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद, यूनानी और एलोपैथिक दवाओं में किया जाता है। इसकी जड़ सबसे उपयोगी मानी जाती है। इनकी जड़ों से निकाला तेल और पाउडर कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में कारगर है।
इन बीमारियों से निपटने में लाभकारी
आयुर्वेद में कूठ के पौधे का प्रयोग सूजन, अस्थमा और छाले आदि परेशानियों को दूर करने में किया गया है। कूठ में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, इनसे पाचन संबंधी परेशानियों दूर होती हैं। इसके अलावा सिर में फोड़े, फुंसी, चेहरे पर मुहासों की समस्या या शरीर में किसी जगह दाद होने पर भी कूठ का प्रयोग किया जाता है। थायरॉयड संबंधी विकार से निपटने में कूठ बहुत लाभकारी है। खासी की परेशानी होने पर कूठ का प्रयोग लाभकारी है।
विश्व भर में 300 प्रजातियां
कूठ एस्ट्रेसी कुल का सदस्य है, जिसका वानस्पतिक नाम सैसुरिया कौस्टस है। यह पौधा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कूठ के नाम से विख्यात है। विश्वभर में इसकी लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 61 प्रजातियां भारत में हैं। इनमें से 10 प्रजातियां लाहौल-स्पीति में पाई जाती हैं। इस औषधीय पौधे में अगस्त से सितंबर तक पुष्प बनते हैं और सितंबर के अंत से बीज बनने शुरू होते हैं। इस औषधीय पौधे के कंदों का ही उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।
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