मैहला (चंबा)। खेत अब खेती की जगह पहरेदारी में बदल गए हैं। लहलहाती गेहूं की फसल के बीच बंदरों के झुंड ऐसे टूट रहे हैं, मानो हर दिन एक नई लड़ाई छिड़ी हो।
हालात यह हैं कि किसान अब अन्नदाता नहीं, अपनी ही मेहनत के चौकीदार बनकर रह गए हैं। मैहला क्षेत्र में इन दिनों बंदरों के झुंड किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गए हैं। ग्राम पंचायत मैहला, गोनणा, कुरांह, जांघी, चेअला, दाड़वी सहित आसपास के क्षेत्रों में लगभग पांच हजार से अधिक किसान खेती पर निर्भर हैं।
वर्तमान में उनकी पूरी दिनचर्या खेतों की सुरक्षा में ही निकल रही है, क्योंकि बंदरों के झुंड कभी भी फसल पर हमला कर देते हैं। किसानों में किशोरी, प्रकाश चंद, मनीष कुमार, अजय कुमार और राज कुमार ने बताया कि सुबह से शाम तक खेतों में रहकर बंदरों को भगाना पड़ता है।
तेज धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद खेत छोड़ना संभव नहीं है, क्योंकि थोड़ी सी चूक भी पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है। कई स्थानों पर बंदरों द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाया जा चुका है।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गेहूं उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान करने की मांग की है। संवाद