चंबा मिंजर मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति देते हिमाचली गायक कुलदीप शर्मा।संवाद
चंबा। 12वीं कक्षा में लगातार तीन बार असफल होना किसी भी छात्र के लिए बड़ा झटका हो सकता है लेकिन कुलदीप शर्मा ने इसे अपनी मंजिल की राह का अंत नहीं बनने दिया।
पढ़ाई में मिली नाकामी को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और संगीत को अपना जीवन। आज वही कुलदीप शर्मा हिमाचली लोक संगीत के सबसे लोकप्रिय गायकों में गिने जाते हैं, जिनकी आवाज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक गूंज रही है।
मिंजर मेले में पहुंचे कुलदीप शर्मा ने बताया कि महज 16 वर्ष की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो से अपने गायन कॅरिअर की शुरुआत की। उस समय वह रेडियो पर गाने वाले सबसे कम उम्र के गायकों में शामिल थे। उनकी पहली एल्बम मेरी प्रीति जिंटा ने पूरे हिमाचल में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और उन्हें घर-घर तक पहचान दिलाई।
वह बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी दिवंगत माता बेगी देवी और पिता बाबू राम रहे। वहीं, उनकी पत्नी बीना शर्मा हर कदम पर उनका साथ निभा रही हैं, जबकि बेटा स्वर दीप शर्मा भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए संगीत की बारीकियां सीख रहा है।
कुलदीप शर्मा ने हिमाचली लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई। वह ब्रिटिश पार्लियामेंट (इंग्लैंड) में हिमाचली लोक संस्कृति की प्रस्तुति देने वाले पहले हिमाचली गायक बने। इस उपलब्धि के लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।
आज कुलदीप शर्मा हिमाचली लोक संगीत की एक मजबूत पहचान बन चुके हैं। उनके 300 से अधिक गीत यूट्यूब और अन्य डिजिटल मंचों पर लोकप्रिय हैं और लाखों श्रोता उनकी गायकी के दीवाने हैं।