राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की विशेष मासिक समीक्षा बैठक में मौजूद चिकित्सक समेत अन्य।
चंबा। स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले टीबी लक्षणों वाले मरीजों की टीबी जांच की जाए। इसके लिए संबंधित चिकित्सक ऐसे मरीजों को जांच के लिए टीबी जांच केंद्र में भेजेंगे।
यह निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर कपिल शर्मा ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की विशेष मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सबसे पहले टीबी रोगियों की पहचान होना जरूरी है। जब टीबी रोगियों की पहचान होगी तो उनका इलाज संभव हो पाएगा। इसके बाद ही देश संपूर्ण रूप से टीबी मुक्त हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली राशि समय पर उपलब्ध करवाई जाए।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार हिमाचल को टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए जो भी टीबी से संबंधित अभियान चलाए जा रहे हैं, उन्हें सफल बनाने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। कहा कि दो सप्ताह से लगातार खांसी, वजन में कमी, शरीर में किसी प्रकार की गांठ, रात को पसीना आना, थूक में खून आना सहित अन्य टीबी रोग के लक्षण हो सकते हैं। सभी खंड चिकित्सा अधिकारी अपने परिक्षेत्र के लोगों को भी जागरूक करें। जिला क्षय अधिकारी डॉ. हरित पुरी ने भी टीबी रोग के बारे में जरूरी जानकारी उपस्थित स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी। कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में टीबी के मामलों का जल्द पता लगाने तथा मरीजों को हर प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थान में जांच की सुविधा दी जा रही है। इस अवसर पर डॉट्स प्लस कमेटी के सदस्य डॉ. संजय, कुलदीप बंसल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. नवदीप राठौर, डॉ. शाम, डॉ. अनुराधा, डॉ. पदमा अग्रवाल सहित अन्य उपस्थित रहे।