चंबा की रामलीला में पहली बार लड़की ने निभाई थी सीता की भूमिका, बिना मेहनताना लिए कर रही हैं मंचन
नवरात्र में ठुकरा देती हैं दूसरे कार्यक्रमों के प्रस्ताव, अभिनय के साथ हिमाचली संस्कृति को भी दे रहीं पहचान
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। मंच पर किरदार अनेक होते हैं, लेकिन कुछ भूमिकाएं कलाकार के लिए आस्था बन जाती हैं। चंबा शहर के ओबड़ी मोहल्ले की रीतिका ठाकुर के लिए सीता माता का किरदार कुछ ऐसा ही है।
वह पिछले 15 वर्षों से चंबा की मुख्य रामलीला में सीता की भूमिका निभा रही हैं। अदाकारा, एंकर और डांसर के रूप में पहचान बना चुकीं रीतिका नवरात्र में रामलीला मंचन के लिए अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर देती हैं। खास बात यह है कि वह यह भूमिका बिना किसी मेहनताने के निभाती हैं।
रीतिका बताती हैं कि चंबा की मुख्य रामलीला में सीता की भूमिका निभाने वाली वह पहली लड़की थीं। ऑडिशन में चार से पांच लड़कियों ने भाग लिया था। अमीन मलिक और रामलीला क्लब के तत्कालीन प्रधान दिनेश महाजन ने उनके अभिनय को परखने के बाद चयन किया। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है। क्लब के वर्तमान प्रधान स्वप्न महाजन सहित सभी सदस्य और कलाकार उन्हें सहयोग देते हैं।
रामलीला के आगे हर प्रस्ताव छोटा
रीतिका के अनुसार नवरात्र के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के निमंत्रण मिलते हैं, लेकिन वह रामलीला को प्राथमिकता देती हैं। उनका कहना है कि जब तक सीता माता का किरदार निभाने की ललक रहेगी, वह मंचन जारी रखेंगी। लोग कई बार भूमिका छोड़ने की सलाह देते हैं, लेकिन उनकी आस्था कम नहीं हुई है।
राष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई प्रतिभा
शोभा राम और कांता देवी की बेटी रीतिका ने स्कूल के समय से सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था। वह गणतंत्र दिवस समारोह में पांच बार भाग ले चुकी हैं। इनमें तीन बार हिमाचल और दो बार पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। केरल, जम्मू, पंजाब, भोपाल और चंडीगढ़ में भी हिमाचली संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर चुकी हैं।
बदलाव के बीच परंपरा कायम
रीतिका बताती हैं कि अब रामलीला में दर्शकों के बैठने की व्यवस्था और मंच का स्वरूप बदल गया है, लेकिन कलाकारों की तैयारियां करीब एक माह पहले शुरू हो जाती हैं। वरिष्ठ और कनिष्ठ कलाकार अनुशासन के साथ अपने किरदारों की तैयारी करते हैं। यही समर्पण उन्हें परंपरा के भविष्य के प्रति आश्वस्त करता है।