पांच किलोमीटर पैदल जंगल पार कर सड़क तक पहुंचते हैं ग्रामीण
मरीजों को पालकी और बच्चों को पैदल तय करना पड़ता है सफर
ग्रामीणों की दो टूक- सड़क नहीं बनी तो विस चुनाव का करेंगे बहिष्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। आजादी के करीब 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत चांजू के छह गांव सड़क सुविधा से महरूम हैं। रडू, माढ़ी, सुंदरी, डिम्ह, फनोता और चेंजला गांवों के करीब 3000 लोग आज भी पगडंडियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांवों से चांजू-बघेईगढ़ सड़क तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर घने जंगल से पैदल गुजरना पड़ता है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब कोई ग्रामीण बीमार पड़ता है। मरीज को पालकी या पीठ पर उठाकर कंधों के सहारे पांच किलोमीटर जंगल पार करवाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या अन्य वाहन की सुविधा मिल पाती है। ग्रामीण चेत सिंह और मोहल लाल ने बताया कि कई बार मरीज को अस्पताल पहुंचाने में काफी समय लग जाता है जिससे उसकी हालत बिगड़ने का खतरा रहता है।
ग्रामीण गोकुल चंद, हीरा लाल और परस राम ने बताया कि सड़क न होने से रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी महंगा पड़ता है। राशन, सीमेंट, सरिया और खाद्य सामग्री खच्चरों के माध्यम से गांव तक पहुंचानी पड़ती है। एक खच्चर के लिए 300 से 500 रुपये तक किराया देना पड़ता है।
सड़क के अभाव में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चे सुबह सात बजे घर से निकलकर जंगल का रास्ता पैदल तय करते हैं और करीब 10 बजे स्कूल पहुंचते हैं। बरसात में फिसलन के कारण हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अभिभावक कई बार बच्चों को स्कूल भेजने से भी रोक देते हैं।
ग्रामीण किशोरी लाल, रंजीत कुमार और दुनी चंद सहित अन्य ने कहा कि चुनाव के दौरान सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो छह गांवों के लोग सामूहिक रूप से चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि सड़क नहीं तो वोट नहीं, मतपेटियां खाली जाएंगी।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने कहा पहले लोग जमीन विभाग के नाम नहीं कर रहे थे। जैसे ही लोग जमीन विभाग के नाम करवाएंगे और सड़क का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।