चंबा। आकांक्षी जिले के मरीजों को किसी भी सरकारी अस्पताल में एंडोस्कोपी करवाने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालांकि, सरकार ने पांच वर्ष पहले चंबा में मेडिकल कॉलेज खोला था।
यहां भी मरीजों को अभी तक यह सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके अलावा जिले में नागरिक अस्पताल भी हैं। यहां एंडोस्कोपी जैसी सुविधा मरीजों के लिए किसी सपने से कम नहीं है। पेट में अल्सर सहित अन्य बड़ी बीमारियों का पता लगाने के लिए एंडोस्कोपी की जाती है। सर्जरी और मेडिसन ओपीडी में आने वाले कई मरीजों को विशेषज्ञ एंडोस्कोपी करवाने का परामर्श देते हैं, जिससे उनकी बीमारी का पता लगाया जा सके। उसके आधार पर आगामी इलाज किया जाता है। हाल ही में चंबा मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों ने मरीज की आंत के कैंसर का ऑपरेशन किया है। इससे पहले मरीज की एंडोस्कोपी करवाई गई थी। मरीज को एंडोस्कोपी जिले के बाहर जाकर करवानी पड़ी।
चंबा में निजी अस्पताल में भी मरीजों की एंडोस्कोपी हो जाती है। यहां एंडोस्कोपी करने के बदले में मनमर्जी की फीस ली जाती है। आकांक्षी जिले के तहत भले ही केंद्र और राज्य की सरकारें चंबा में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सेवाएं मुहैया करवाने के दावे करती हों, लेकिन धरातल पर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल काफी खराब है। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में एंडोस्कोपी नहीं होती। लोगों में हेम राज, चमन सिंह, संजय शर्मा, विनोद कुमार, किशोर गुप्ता और दीपक शर्मा ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि चंबा अस्पताल में एंडोस्कोपी शुरू करवाई जाए। जिले में मेडिकल कॉलेज सहित नौ नागरिक अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। उधर, मेडिकल कॉलेज के मीडिया समन्वयक डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि सरोल में बन रहे नए भवन में मरीजों को कई बड़ी स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। एंडोस्कोपी शुरू करने के लिए भी उचित कदम उठाए जा रहे हैं।