चंबा कार्यालय गेट के बाहर बिजली संशोधन विधेयक को लेकर प्रदर्शन करते बिजली बोर्ड कर्मचारी।संवाद
चंबा। बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने वीरवार को जिलेभर में विद्युत संशोधन बिल का विरोध किया है। सुबह ही जिला मुख्यालय में यूनियन के कर्मचारियों ने पेन और टूल डाउन हड़ताल शुरू कर दी। इसमें बोर्ड के कर्मचारियों, अभियंताओं, आउटसोर्स कर्मचारी और पेंशनभोगियों ने भाग लिया और इस विधेयक के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण के लिए दबाव बना रही है। हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 का मसौदा लाया गया है। इसे वर्तमान बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है। जिन राज्यों में बिजली वितरण का कार्य निजी हाथों में सौंपा गया है, वहां यह प्रयोग अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है।
इससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी वित्तीय एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार शेष सरकारी बिजली कंपनियों को भी प्रतिस्पर्धा के नाम पर निजी हाथों में देने के प्रयास कर रही है, जो सरासर गलत है। दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी पर ही रखी गई है।
इसे राज्य सरकारों की संघीय शक्तियों को कमजोर करने का प्रयास भी बताया गया। पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटरिंग योजना का भी विरोध किया और कहा कि इसका भारी वित्तीय बोझ प्रदेश की जनता पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण करने के बजाय उसे मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती की जाए। साथ ही कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। इसके अलावा 10-12 वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। साथ ही लंबित सेवानिवृत्ति लाभों का तत्काल भुगतान करने की मांग भी दोहराई गई। प्रदर्शन में विद्युत बोर्ड पेंशनर फॉर्म से नर सिंह रावत, राम राम शर्मा, जगदीश, पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन से दलीप चौणा, बुद्दिया राम और बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन से राज्य संयुक्त सचिव मुकेश कुमार जट सहित अन्य कर्मचारी और पेंशनर मौजूद रहे।