सलूणी (चंबा)। उपमंडल सलूणी की आठ सड़कों के निर्माण की राह वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की क्लीयरेंस न होने के कारण रुक गई है। इन सड़कों के लिए पांच वर्षों में केवल सर्वे ही हुए हैं। सड़कें न बनने से बीमारों, किसानों और बागवानों की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोग सड़क सुविधा के अभाव में लंबी दूरी पैदल तय करने के लिए मजबूर हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए पालकी और पीठ ही एकमात्र साधन हैं। कई बार तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही दम तोड़ देते हैं। वहीं, किसान और बागवान अपनी फसलें मंडियों में ले जाने के लिए खच्चरों पर निर्भर हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
किसानों-बागवानों की व्यथा
सड़क नहीं होने से फसल मंडी तक समय पर नहीं पहुंच पाती। खच्चरों पर फसल ढोने में मेहनत और समय दोनों बर्बाद होते हैं। आजादी के बाद भी सड़क के लिए तरस रहे हैं। सन्नी ठाकुर, किसान
सड़क बनने से फसल जल्दी बिकेगी और बच्चों-बुजुर्गों का सफर भी आसान होगा, लेकिन इसी उम्मीद में पांच साल बीत चुके हैं। सड़क आज दिन तक नहीं बनी है। खेम राज, बागवान
बारिश में पैदल चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। कई बार फसलें रास्ते में गड़बड़ा जाती हैं। जल्द सड़क बनती है तो उनकी मेहनत और पैसा दोनों की बचत होगी। संजीव शर्मा, किसान
जब फसल और सब्जियों का सीजन होता है तो सड़क तक फसलों को पहुंचाने की चिंता सताने लगती है। आखिर कब गांवों तक सड़क पहुंचेगी तो उनकी परेशानी दूर होगी। हेम राज, बागवान
सड़क निर्माण की समस्या विभाग तक पहुंचा दी है। उम्मीद है जल्द समाधान हो जाए। डीएस ठाकुर, डलहौजी विधायक
ये सड़क निर्माण एफसीए केस के कारण अटके हुए हैं। इसके बारे में वन विभाग को रिपोर्ट भेजी है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, निर्माण कार्य शुरू कर दिएं जाएंगे। कुमुद उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
ये सड़कें लटकींं
चियू गली-दगोटी, 8 किमी 400
रोड कुंड–छतरेड़ 5 किमी 400
पुखरी-भटोली 4 किमी 150
भड़ैला-हडल वाया भजरोता 9 किमी 600
त्रिभोल 1.5 किमी 100
नड्डल-जुतराहन 6 किमी 300
लुहाणी-सरार 3 किमी 100
सकोटी-गजरिंडू 5 किमी 100