किहार(चंबा)। उपमंडल किहार के अधीन आने वाले क्षेत्र में लंपी रोग पशुपालकों की चिंताएं बढ़ा रहा है। क्षेत्र में लंपी रोग से अब तक आठ मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि, 400 से अधिक पशुधन बीमारी से पीड़ित है। इसके उपचार के लिए पशुपालकों की भी मुश्किलें बढ़ी हैं।
पशुपालकों की मानें तो समय रहते यदि पशुपालन विभाग की ओर से विशेषज्ञों की टीम क्षेत्र में दौरा कर बीमारी की रोकथाम के लिए उचित प्रयास नहीं करती है तो पशुधन की काफी हानि होगी। साथ ही पशुधन से ही अपने परिवारों का गुजर बसर करने वाले मवेशी पालकों को लाखों की चपत तक लगेगी। ग्राम पंचायत भांदल, स्नूंह, किहार, किलोड़, डियुर, पिछला डियुर, भडेला, कंधवारा सहित कई पंचायतों में लंपी रोग ने कहर बरपा दिया है।
क्षेत्र में अचानक मवेशियों के शरीर पर फोड़े बनने के साथ ही गिलटियां उभर आ रही हैं। मवेशियों को बुखार आने से मवेशियों की हालत पतली होती जा रही है। इससे पशुपालक चिंतित हैं। हैरानी की बात यह है कि अभी तक पशुपालन विभाग की ओर से विशेषज्ञों की टीम क्षेत्र में नहीं भेजी जा सकी है। विशेषज्ञों के अभाव में पैरा स्टाफ के कर्मी ही मोर्चा संभाले हुए हैं। पशुपालकों में अशोक कुमार, लाली, सुरेंद्र कुमार, राकेश कुमार, युसुफ मोहम्मद, प्यारदीन, नाम मोहम्मद, नरेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र में लंपी रोग ने पशुपालकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। कहा कि समय रहते यदि पशुपालन विभाग की ओर से इसकी सुध न ली गई तो पशुधन को नुकसान हो रहा है।
विभाग को दे दी है जानकारी
इस संबंध में पशुपालन सहायक मोहम्मद सादिक बट्ट ने माना कि क्षेत्र में आठ मवेशियों की लंपी रोग से मौत हुई है और अधिकांश पशु लंपी रोग से ग्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि इस बारे विभाग को अवगत करवा दिया है।