मानसिक रूप से परेशान हालत में मरीजों का इलाज कर रहे हैं इंटर्न डॉक्टर
इमरजेंसी से लेकर ओपीडभ् और वार्ड में मरीजों का इलाज करने में दे रहे डयूटी
सरकार से बजट न मिलने के कारण प्रबंधन मानदेय देने में हो रहा नाकाम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में दिन-रात सेवाएं देने वाले इंटर्न डॉक्टरों को एक महीने से मानदेय नहीं मिला है। कमरों का किराया भी अपने परिजनों से पैसे मांग कर चुकाना पड़ रहा है।
सरकार और अस्पताल प्रबंधन उनकी मदद नहीं कर रहे हैं। आपातकालीन कक्ष हो या ओपीडी सेवाएं, सभी जगह इंटर्न डॉक्टर विशेषज्ञों के साथ मिलकर मरीजों का इलाज करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें अभी तक मई महीने का मानदेय नहीं मिला है। जुलाई के मानदेय को लेकर भी असमंजस है। इन डॉक्टरों ने जब प्रबंधन ने मानदेय की बात की तो उन्हें बताया गया कि सितंबर में उन्हें एक महीने का मानदेय मिल सकता है। ऐसे में वे काफी चिंतित हैं।
मेडिकल कॉलेज में करीब 115 इंटर्न डॉक्टर दिन-रात मरीजों का इलाज करने में सेवाएं दे रहे हैं। गरीब या मध्यवर्ग परिवार से संबंध रखने वाले डॉक्टरों के लिए अपने कमरों का किराया और खाने का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। उन्हें परिवार वालों से पैसे मांगने पड़ रहे हैं। परिवार वालों को जहां उनसे पैसे मिलने की उम्मीद थी तो वहां उन्हें खुद पैसे देने पड़ रहे हैं। इंटर्न डॉक्टर विभागीय कार्रवाई की वजह से खुलकर इसका विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं। हर माह उन्हें मानदेय के रूप में सरकार 20000 रुपये देती है।
उधर, मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि सरकार को इंटर्न डॉक्टरों के मानदेय के बारे में अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही सरकार उनके मानदेय का भुगतान कर सकती है।