चंबा। जिला चंबा के नागरिक अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। हालात यह हैं कि सरकार बिना आंदोलन और दबाव के अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती करने के मूड में नजर नहीं आ रही। कुछ दिन पहले किहार अस्पताल में डॉक्टर न होने पर उपप्रधान को आमरण अनशन पर बैठना पड़ा। नतीजा यह निकला कि हड़ताल के कुछ दिन बाद वहां सरकार ने एक डॉक्टर की नियुक्ति कर दी। इसी तरह, भरमौर अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती को लेकर स्थानीय विधायक को मामला उच्च न्यायालय तक ले जाना पड़ा। इसके बाद ही सरकार ने तीन डॉक्टरों की तैनाती की।
लोगों का कहना है कि जहां लोग चुपचाप हालात झेल रहे हैं, वहां सरकार कोई कदम नहीं उठा रही, लेकिन जहां जनता संघर्ष का रास्ता अपनाती है, वहां तुरंत डॉक्टर भेज दिए जाते हैं। ऐसे में लोगों का विश्वास टूटता जा रहा है और वे मजबूरी में हड़ताल और अनशन जैसे रास्ते अपना रहे हैं।
ग्रामीण हंसराज, केवल कुमार, प्रदीप कुमार, चंद राम, विनोद कुमार, देसराज, सुरेंद्र और दिनेश कुमार ने बताया कि जिले में सात नागरिक अस्पताल हैं। इनमें से कई में डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली हैं। सरकार और प्रशासन को कई बार लिखित में मांगपत्र दिए गए, लेकिन किसी पर गौर नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब डॉक्टरों की तैनाती करवाने के लिए उन्हें संघर्ष करना ही पड़ेगा। सरकार की गंभीरता सिर्फ वहां तक सीमित है जहां दबाव और विरोध हो रहा है।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिपिन ठाकुर ने कहा कि जिला चंबा के नागरिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है।