सिंचाई सुविधा के अभाव में बनेट और कुडणू के दो सौ किसानों ने छोड़ी धान की खेती
कहा, 2020 में आई आपदा के बाद नहीं दुरूस्त हो पाई कूहल, नहीं मिल पाया बजट
बलविंद्र मनकोटिया
चुवाड़ी (चंबा)। एक तरफ सरकार किसानों की फसलों को संरक्षण देने के दावे करती है, दूसरी ओर उपमंडल भटियात की कुडणू और बनेट पंचायतों में धान की खेती करना किसानों ने छोड़ दिया है।
सिंचाई कूहल आपदा में बह गई है। छह साल पहले आपदा की भेंट चढ़ी नरोला से वाया लग्गा कूहल करीब दो सौ किसानों के खेतों को सींचती थी मगर अब आपदा के चलते इस कूहल का नामोनिशान मिट गया। हालांकि, किसानों ने काफी प्रयास किए। भू संरक्षण विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों को दरवाजा खटखटाया मगर छह साल बाद भी यह कूहल दोबारा शुरू नहीं हो पाई। पंचायत बनेट और कुडणू में काफी मात्रा में धान की पैदावार रहती थी। छह साल से सिंचाई सुविधा न मिलने के चलते अब किसानों ने धान की पैदावार करना ही बंद कर दिया है। उधर, भू संरक्षण अधिकारी चंद्र शेखर ने कहा कि यह मामला ध्यान में है। बजट के अभाव में यह कार्य रुका है। पैमाइश करवा दी गई है।
कूहल की मरम्मत को लेकर कई बार एसडीएम चुवाड़ी को ज्ञापन दे चुके हैं मगर अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। - विनोद शर्मा
भू संरक्षण विभाग को 2020 से कई बार कूहल की मरम्मत करने के बारे में अवगत करवाया। विभाग ने पैमाइश की हे। आज तक कूहल शुरू नहीं हो पाई है। - बलविंदर सिंह
कूहल का मामला प्रशासन और विभाग से उठाया जा रहा है। विभाग बजट न होने की बात कहता है। छह साल में कूहल के लिए बजट का प्रावधान क्यों नहीं हो पाया। - देस राज
धान की फसल टनों के हिसाब से होती रही है। वहां अब बिना सिंचाई सुविधा के किसान धान की पैदावार करना छोड़ चुके हैं। प्रशासन को इस बारे में सुध लेनी चाहिए। - कैप्टन सुरेंद्र सिंह