संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा।
उत्तर भारत की ऐतिहासिक और पवित्र मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रोपवे के जरिये भरमाणी माता के दर्शन करने की इच्छा अभी पूरी होती नहीं दिख रही है। भरमौर से भरमाणी के लिए रोपवे का प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने साल 2019 में रोपवे का शिलान्यास किया था। इसे भारत पर्वतमाला शृंखला में डालकर केंद्र सरकार की ओर से 50 लाख रुपये भी जारी किए गए हैं। विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों ने रोपवे के लिए निरीक्षण भी किया है, लेकिन यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया।
मणिमहेश यात्रा के दौरान इस बार भी भरमौर से भरमाणी माता मंदिर तक पैदल ही आवाजाही करनी पड़ेगी। भरमौर से भरमाणी माता मंदिर तक पुराना बस स्टैंड वाया ददमा-भरमाणी तक छह किलोमीटर सड़क बनी है। सड़क तंग होने से मणिमहेश यात्रा के दौरान जाम लग जाता है। बाड़ी से वाया मलकौता गांव होते हुए भरमाणी माता मंदिर तक पैदल ढाई किलोमीटर का रास्ता है। रास्ते में किसी प्रकार की सुविधा यात्रियों को नहीं मिलती है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता मीत कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में ज्वाइन किया है। पूरी जानकारी जुटाकर ही कुछ कहा जा सकता है।
भरमाणी माता के दर्शन के बाद शुरू होती है मणिमहेश यात्रा
मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु सबसे पहले माता भरमाणी के दर्शन करते हैं। यहां स्थित कुंड में स्नान के बाद मणिमहेश यात्रा पर निकलते हैं। भरमाणी माता के दर्शन और स्नान के बिना मणिमहेश यात्रा अधूरी मानी जाती है। यात्रा के एक अहम पड़ाव माने जाने वाले भरमाणी माता मंदिर तक रोपवे का निर्माण होने से श्रद्धालुओं को सुविधा होगी।
नौ साल से फाइलों में ही था प्रोजेक्ट
वर्ष 2013 में भरमौर-भरमाणी रोपवे बनाने की योजना बनाई गई थी। 2015 में कोलकाता की एक संस्था इस प्रोजेक्ट के लिए आगे आई थी और रोपवे निर्माण की हामी भरी थी। बावजूद इसके रोपवे बनाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई थी। 29, अक्तूबर 2019 को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिलान्यास किया था।
अतिरिक्त उपायुक्त नवीन तंवर ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भारत पर्वतमाला शृंखला में रोपवे का प्रोजेक्ट डाला गया है। अब तक कुछ राशि भी जारी हो चुकी है। शिमला से संयुक्त टीम भी रोपवे के लिए निरीक्षण कर गई है। आगामी प्रक्रिया इस दिशा में चल रही है।