उपमंडल भरमौर में पंचायतीराज चुनाव 2015 में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है कि चुनाव में खड़े प्रत्याशियों की ओर से अपनी-अपनी पंचायत व क्षेत्र के लिए कोई विकासात्मक नजरिया प्रस्तुत किया हो।
अक्सर प्रचार प्रसार सामग्री में भी ज्यादातर प्रत्याशी विकास की बात करने की जगह अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की बात कर रहे हैं। ऐसे में छब्बीस नवंबर को मतदाता भी किस उम्मीदवार के सिर पर सेहरा बांधते हैं यह देखना और जानना बेहद रोमांचक होगा।
भरमौर में बीते चुनाव का आकलन करें तो प्रत्याशियों की ओर से क्षेत्र की तरक्की व पंचायत के विकास के लिए लगातार प्रचार प्रसार सामग्री के माध्यम से घोषणा की जाती थी लेकिन इस बार राजनीति विकास पर हावी होने के चलते इस बार के पंचायत चुनाव में विकास और तरक्की का मुद्दा कहीं नहीं दिख रहा है।
पंचायतीराज चुनाव में इस बार इतने ज्यादा उम्मीदवार अलग अलग पदों के लिए खड़े हैं कि मतदाता भी इस दुविधा में हैं किसके पक्ष में मतदान करें। कई-कई उम्मीदवार प्रदेश के अंदर सत्तारूढ़ दलों का सहारा ले रहे हैं तो कई अपनी ईमानदार छवि से मतदाताओं को रिझाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।