चंबा। जिले में किसानों का बारिश का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। अब खेतों में दरारें आने से उनके माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गईं हैं। वर्तमान में करीब 77 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, मटर और लहसुन की फसलें सूखने के कगार पर हैं।
किसानों ने बताया कि आधा दिसंबर बीत चुका है, लेकिन राहत की फुहारें नहीं बरसी हैं। बारिश के इंतजार में 10 फीसदी गेहूं की बिजाई ठप पड़ी है, जबकि 90 प्रतिशत बोई गई गेहूं की फसल मुरझाने लगी है। वे मंदिरों तक पहुंचकर राहत की प्रार्थना कर रहे हैं।
जिला चंबा सहित मैहला, सलूणी, भरमौर, चुराह और भटियात में साढ़े 22 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेंहू की बिजाई होती है। इसके अलावा 1500 हेक्टेयर भूमि पर मटर, 2000 हेक्टेयर पर लहसुन की फसल उगाई जाती है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो संकट और गंभीर हो जाएगा।
बारिश न होने से गेहूं की फसल सूख रही है। अगर मौसम का रुख जल्द नहीं बदला तो हमारी मेहनत और निवेश दोनों बर्बाद हो जाएंगे। सुभाष राणा, किसान
सब्जी और मटर की बुआई भी प्रभावित हो रही है। आर्थिक नुकसान होने की पूरी संभावना है। खेतों में दरारें अब साफ दिख रही हैं। शाहीद मोहम्मद, किसान
इन दिनों गेहूं, मटर और लहसुन की फसल के लिए बारिश की बेहद आवश्यकता है। दस प्रतिशत गेहूं की बिजाई अभी तक नहीं हो पाई है। आलू की बिजाई का सीजन भी पास है खेतों में सूखापन किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। बीज समय से किसानों की डिमांड पर पहुंचा दिया है। डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग चंबा