महिलाओं का चंबा रूमाल का प्रशिक्षण देती इंदु शर्मा। संवाद
चंबा। शहर की हस्तशिल्प प्रशिक्षक इंदु शर्मा आज एक सशक्त महिला की मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने धागों से चंबा रुमाल की कला के दम पर खुद के लिए भविष्य की राह ही नहीं बनाई बल्कि 200 महिलाओं को मुफ्त प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है।
इंदु शर्मा ने वर्ष 2001 में हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान चंबा रुमाल को बनाना सीखा। सूक्ष्म कढ़ाई की कला को उन्होंने वर्षों की तपस्या से साधा। कला में उनकी गहराई और लगन देखकर उन्होंने निर्णय लिया कि यह परंपरा केवल उनके तक सीमित न रहे बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचे।
वर्ष 2011 में उन्होंने प्रशिक्षण कार्य शुरू किया। इसके बाद 2012 से अब तक वह 200 से अधिक युवतियों और महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुकी हैं। हर प्रशिक्षु को वह न केवल चंबा रुमाल बनाना सिखाती हैं बल्कि धागों की महीन पकड़, पारंपरिक आकृतियों की बारीक कढ़ाई, रंग संयोजन और डिजाइन की सांस्कृतिक अहमियत भी समझाती हैं।
वर्तमान में 20 युवतियों को सीखा रहीं, 30 हजार रुपये प्रति माह कमाई
वर्तमान में इंदु शर्मा 20 युवतियों को इस विरासत की बारीकियां सिखा रही हैं। यही नहीं वह चंबा रुमाल की कला से प्रति माह 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित करती हैं। अपने हुनर, समर्पण और उल्लेखनीय योगदान के कारण इंदु शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी कोशिशों ने न केवल परिवार को आत्मनिर्भर बनाया है बल्कि सैकड़ों महिलाओं को भी आर्थिक स्वावलंबन और आत्मविश्वास की नई राह दिखाई है।
आत्मनिर्भरता केवल कमाई नहीं बल्कि खुद पर विश्वास पैदा करने का नाम है। यदि दिल में जज्बा हो तो हर मुश्किल केवल एक सीढ़ी बन जाती है। इंदु शर्मा