सिहुंता(चंबा)। सिहुंता में महाविद्यालय को खुले चार साल बीत गए हैं, लेकिन अभी तक महाविद्यालय को अपना भवन तक नसीब नहीं हो पाया है। भवन के अभाव में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सिहुंता में ही महाविद्यालय की कक्षाएं चली हुई हैं। हैरानी की बात यह है कि महाविद्यालय के भवन निर्माण के लिए साढे़ छह करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक इस दिशा में कोई कदम न उठाना विद्यार्थियों पर ही भारी पड़ रहा है। ऐसे जहां विद्यार्थियों को परेशानियों का ही सामना करना पड़ रहा है तो वहीं, दूसरी और भवन निर्माण में होने वाली देरी से ग्रामीण खासे खिन्न हैं।
महाविद्यालय सिहुंता में विभिन्न संकायों में शिक्षा हासिल करने के लिए समोट, सिहुंता, मनुहता, टुंडी, गरनोटा, कामला, रजैं, द्रम्मनाला, धुलारा, काथला, ककरोटी, मोथला, सरोग से अमूमन 400 छात्र-छात्राएं पहुंचती हैं। बावजूद इसके आज तक महाविद्यालय के पास अपना भवन तक नहीं है। भवन के अभाव में विभिन्न संकायों की कक्षाएं राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सिहुंता में बीते चार वर्षो से चल रही हैं। भवन निर्माण को लेकर बाकायदा छह करोड़ के करीब एक वर्ष पूर्व धनराशि भी आ चुकी है, लेकिन भवन निर्माण का कार्य आरंभ न होना कई प्रकार के सवाल खड़े कर रहा है। अभिभावकों में दलवीर सिंह, सुरेंद्र कुमार, रघुवीर सिंह, करनैल सिंह, माधो राम, उत्तम चंद, केहर सिंह ने बताया कि महाविद्यालय सिहुंता का अपना भवन न होना चिंतनीय विषय है। ऐसे में दूरदराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानियां ही उठानी पड़ रही हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करवाने की मांग उठाई है।
कोट
-महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विद्यासागर ने बताया कि महाविद्यालय के भवन निर्माण संबंधी न्यायालय में केस चला होने की सूरत में एफसीए को केस नहीं भेजा जा सका है। उन्होंने बताया न्यायालय से केस का फैसला होने के बाद ही इस दिशा में कोई कदम उठाया जा सकता है।
आरोप, विधायक ने नहीं किए प्रयास
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि सिहुंता में जब कॉलेज मंजूर हुआ। उस वक्त कॉलेज को फंक्शनल करने का कोई स्थान नहीं था। ऐसे में रावमापा में कॉलेज की कक्षाएं चलाई गईं। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नींव का पत्थर भी रखा। भवन निर्माण के लिए 40 बीघा जमीन थी। बताया कि वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद स्थानीय विधायक विक्रम जरयाल ने महाविद्यालय को बंद करवाने के लिए भरसक प्रयास किए। कहा कि पहले से खुले कॉलेज के लिए भवन तक न बनवा पाना स्थानीय विधायक का नालायकी है।