चंबा। लगन और हुनर हो तो घर की चहारदीवारी भी अवसरों की दुनिया बन सकती है। चंबा के बारगाह की सुनीता ने यह बात सच कर दिखाई है। घर की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने मोटे अनाजों से बिस्किट बनाना शुरू किया और आज उनके बनाए बिस्किट बेहतर स्वाद के साथ स्वास्थ्यवर्धक हैं।
घर बैठे सुनीता ने केक और बिस्किट बनाने का प्रशिक्षण लेने की सोची। इसके लिए उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला लिया। वहां उन्होंने विशेष प्रशिक्षण लिया और लौटकर अपने घर में ही एक छोटी यूनिट शुरू की, जहां वह आटा, ज्वार और बाजरा जैसे स्थानीय अनाजों से पूरी तरह स्वदेशी और पोषक बिस्किट तैयार करने लगीं। इनमें न कोई मिलावट है, न ही कोई रासायनिक पदार्थ है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने आसपास के क्षेत्र में ही बिक्री शुरू की, लेकिन धीरे-धीरे उनके बिस्किट चंबा से बाहर अन्य जिलों तक पहुंच गए। मेलों में स्टॉल लगाने से लेकर फोन पर ऑर्डर मिलने से उनका काम लगातार बढ़ने लगा। अब इस कारोबार से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी और साथ ही अन्य युवतियों को इसका प्रशिक्षण देना शुरू किया, ताकि उनकी तरह वे भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सके।
35 लड़कियों को दिखाई राह
सुनीता अब तक 35 लड़कियों को बिस्किट बनाने की कला सिखा चुकी हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
अगर मन लगाकर काम किया जाए तो घर बैठे भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। हर महिला में कोई न कोई हुनर छिपा होता है, बस जरूरत है उसे पहचानने की। सुनीता