कागजों में सफाई, जमीन पर गंदगी
स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 में चंबा की रैंकिंग तीन पायदान गिरी
न डंपिंग साइट, न सफाई कर्मचारी, नालों में गंदगी
शौचालयों की सफाई के दावे भी खोखले
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला मुख्यालय स्वच्छता के दावों में लगातार पिछड़ता जा रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट में चंबा की रैंकिंग पिछले वर्ष की तुलना में तीन पायदान नीचे गिर गई है। इससे नगर परिषद की सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई है। शहर में न तो कोई स्थायी डंपिंग साइट है और न ही पर्याप्त सफाई कर्मचारी। जहां नगर परिषद के 40 सफाई कर्मचारी काम करते थे। वहीं, आज महज 15 काम कर रहे हैं। यही वजह है कि नदी-नालों से लेकर रिहायशी इलाकों तक गंदगी के अंबार लगे हैं।
नगर के कई क्षेत्रों में कचरे का नियमित निपटान नहीं हो रहा है। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। नगर परिषद के अनुसार पिछले चार साल के आंकड़ों के मुताबिक चंबा को स्वच्छता सर्वेक्षण में कम रैंकिंग मिली है। पिछली बार यह रैंकिंग 25 थी जो अब 28 पहुंच गई है। जबकि, नप डलहौजी पिछले साल की अपेक्षा से इस साल बेहतर रैंकिंग पर रहा है लेकिन, चंबा में स्वच्छता अभियान के तहत किए दावों की हकीकत सामने आ गई है। कई शौचालय गंदगी से पटे हैं और सैनिटेशन व्यवस्था शून्य है। इससे यही साबित हो रहा है कि नगर परिषद केवल कागजों में अभियान चला रही है। असल में कोई सफाई नहीं हो रही। नगर परिषद की उदासीनता और संसाधनों की कमी चंबा की रैंकिंग को लगातार गिरा रही है।
नगर परिषद की अध्यक्ष नीलम नैयर का कहना है कि स्थायी डंपिग साइट के लिए जमीन तलाशी जा रही है। साथ ही अब सफाई कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी जिससे अगले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में चंबा अच्छी रैंकिंग पर रहे। इसके लिए लोगों को भी सहयोग करना पड़ेगा कि खुले में कचरा न फेंकें।