चंबा मेडिकल कॉलेज की हड्डी रोग ओपीडी में रोज 8 से 10 बच्चे, 8-10 साल की उम्र में भी गर्दन दर्द और अकड़न की शिकायत
पहले बड़ी उम्र के लोगों में अधिक दिखती थीं ऐसी शिकायतें, लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने को डॉक्टर मान रहे वजह
प्रवीण कुमार
चंबा। मोबाइल की स्क्रीन पर घंटों झुके रहने की आदत अब बच्चों की गर्दन पर असर डालती दिखाई दे रही है। चंबा मेडिकल कॉलेज की हड्डी रोग ओपीडी में रोजाना आठ से दस बच्चे गर्दन दर्द, अकड़न और असहजता की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार कम उम्र में इस तरह की शिकायतों का सामने आना चिंता का विषय है। पहले गर्दन से जुड़ी ऐसी समस्याएं मुख्य रूप से 30 से 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 8 से 10 साल के बच्चों में भी ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
मोबाइल इस्तेमाल करते समय बच्चे अक्सर गर्दन नीचे झुकाकर लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं। लगातार इसी स्थिति में स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ सकता है। खेलकूद और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम होना भी बच्चों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। चिकित्सक इसी वजह से अभिभावकों को बच्चों का मोबाइल इस्तेमाल सीमित करने और नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने की सलाह दे रहे हैं।
दर्द को सामान्य थकान मानकर न छोड़ें
बच्चे को लगातार गर्दन दर्द, अकड़न या असहजता की शिकायत हो तो इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शिकायत बनी रहने पर चिकित्सकीय जांच करवाना उचित है।
कम उम्र में शिकायत को गंभीरता से लेने की जरूरत
हड्डी रोग विभाग के एचओडी डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि कम उम्र के बच्चों में गर्दन से जुड़ी सर्वाइकल की शिकायतें चिंताजनक हैं। अभिभावकों को बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने की जरूरत है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत को सीमित करने के साथ बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए समय देना जरूरी है।