बारिश, फिसलन और 500 फीट गहरी खाई भी नहीं रोक सकी हौसला
पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। मूसलाधार बारिश, फिसलन भरे रास्तों और करीब 500 फीट गहरी खाई के बावजूद ग्रामीण अपनी जान की परवाह किए बिना पुलिस, अग्निशमन विभाग और बचाव दल के साथ राहत अभियान में जुट गए। उन्होंने पांचों लोगों के शवों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
स्थानीय निवासी देवराज ने बताया कि मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से नीचे खाई में दुर्घटनाग्रस्त कार देखी। सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुए रेस्क्यू अभियान में दुर्गम ढलान और लगातार हो रही बारिश सबसे बड़ी चुनौती रही।
ऐसे में आसपास के ग्रामीण रस्सियों और बचाव उपकरणों के साथ टीमों के साथ खाई में उतरे और तीन घंटे तक लगातार अभियान में जुटे रहे। प्रत्यक्षदर्शी प्रकाश चंद के अनुसार कई जगह इतनी फिसलन थी कि एक-एक कदम संभलकर रखना पड़ रहा था। शवों को खाई से बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं था लेकिन ग्रामीणों और बचाव दल ने मिलकर अभियान पूरा किया। इसके बाद शवों को नागरिक अस्पताल डलहौजी ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
स्थानीय निवासी सुभाष कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही गांव के लोग बिना देर किए मौके पर पहुंच गए। उनका कहना था कि ऐसे समय में किसी की मदद करना हर नागरिक का कर्तव्य है। विपरीत परिस्थितियों में भी सभी ने एकजुट होकर राहत कार्य किया, जिससे बचाव अभियान तेजी से पूरा हो सका।
पहले भी निभाते रहे हैं मानवीय जिम्मेदारी
लाहड़ और आसपास के ग्रामीण पहले भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले हादसों के दौरान प्रशासन की मदद करते रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार बचाव दल के पहुंचने से पहले स्थानीय लोग ही सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं और राहत कार्य शुरू कर देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा या हादसे के समय प्रशासन और समाज की साझेदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है।