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Chamba Road Accident: गैहरा में पसरा मातम, एक परिवार की पांच मौतों से हर आंख नम; गांव में नहीं जला चूल्हा

Wed, 29 Jul 2026 11:08 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।

सार

चंबा के लाहड़ के पास हुए सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद गैहरा गांव में गहरा शोक है। मंगलवार को गांव में चूल्हे नहीं जले और हर ओर मातम का माहौल रहा। रात को शव गांव पहुंचने पर परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। बुधवार को पांचों का एक साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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रिपन और रिंपी।/लाहड़ हादसे में जान गंवाने वाले परिवार का घर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ के समीप हुए एक हृदयविदारक सड़क हादसे ने गैहरा गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस भीषण दुर्घटना में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की दुखद मृत्यु हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। मंगलवार को गांव में न तो रोजमर्रा की चहल-पहल दिखी और न ही घरों में चूल्हे जले। हर तरफ सिर्फ अपनों को खोने का दर्द और मातम का माहौल था।

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एक परिवार की पांच जिंदगियां लील गया हादसा
हादसे की खबर मिलते ही गैहरा गांव में मातम पसर गया। हर गली, चौपाल और आंगन में सिर्फ इस दर्दनाक घटना की चर्चा थी। मृतकों के घर पर सुबह से ही रिश्तेदारों, ग्रामीणों और परिचितों का तांता लगा रहा। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। महिलाएं विलाप कर रही थीं, जबकि बुजुर्ग गम में डूबे हुए खामोशी से सब देख रहे थे। सभी के मन में यही सवाल था कि कैसे एक ही पल में पूरा परिवार उजड़ गया। गांव के बुजुर्गों ने अपने जीवन में ऐसा हृदयविदारक दृश्य कभी नहीं देखा, जब एक ही परिवार की पांच अर्थियां एक साथ उठानी पड़ी हों।

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सामुदायिक एकजुटता और गहरा सन्नाटा
इस त्रासदी ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद, लोगों ने अपने रोजमर्रा के काम छोड़ दिए और शोकाकुल परिवार के साथ खड़े नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी की आंखें नम थीं और पूरे गांव पर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। मंगलवार रात करीब 8 बजे जब पांचों शव गांव पहुंचाए गए, तो माहौल में चीख-पुकार मच गई। परिजन बेसुध होकर अपनों से लिपट गए, और आसपास के ग्रामीण उन्हें संभालने और ढांढस बंधाने का प्रयास करते रहे, लेकिन हर आंख से आंसू बह रहे थे। गांव में शोक की ऐसी लहर दौड़ी कि माहौल देर रात तक गमगीन बना रहा।

अंतिम संस्कार और स्थायी टीस
बुधवार को पैतृक श्मशानघाट में पांचों का अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें पूरे गांव के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे। यह हादसा सिर्फ एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गैहरा गांव के लिए एक ऐसी त्रासदी बन गया है, जिसकी टीस लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी। यह घटना सड़क सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंताएं भी उजागर करती है।
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बारिश, फिसलन और 500 फीट गहरी खाई भी नहीं रोक सकी हौसला
पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। मूसलाधार बारिश, फिसलन भरे रास्तों और करीब 500 फीट गहरी खाई के बावजूद ग्रामीण अपनी जान की परवाह किए बिना पुलिस, अग्निशमन विभाग और बचाव दल के साथ राहत अभियान में जुट गए। उन्होंने पांचों लोगों के शवों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।



स्थानीय निवासी देवराज ने बताया कि मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से नीचे खाई में दुर्घटनाग्रस्त कार देखी। सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुए रेस्क्यू अभियान में दुर्गम ढलान और लगातार हो रही बारिश सबसे बड़ी चुनौती रही।

ऐसे में आसपास के ग्रामीण रस्सियों और बचाव उपकरणों के साथ टीमों के साथ खाई में उतरे और तीन घंटे तक लगातार अभियान में जुटे रहे। प्रत्यक्षदर्शी प्रकाश चंद के अनुसार कई जगह इतनी फिसलन थी कि एक-एक कदम संभलकर रखना पड़ रहा था। शवों को खाई से बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं था लेकिन ग्रामीणों और बचाव दल ने मिलकर अभियान पूरा किया। इसके बाद शवों को नागरिक अस्पताल डलहौजी ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।

स्थानीय निवासी सुभाष कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही गांव के लोग बिना देर किए मौके पर पहुंच गए। उनका कहना था कि ऐसे समय में किसी की मदद करना हर नागरिक का कर्तव्य है। विपरीत परिस्थितियों में भी सभी ने एकजुट होकर राहत कार्य किया, जिससे बचाव अभियान तेजी से पूरा हो सका।
पहले भी निभाते रहे हैं मानवीय जिम्मेदारी

लाहड़ और आसपास के ग्रामीण पहले भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले हादसों के दौरान प्रशासन की मदद करते रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार बचाव दल के पहुंचने से पहले स्थानीय लोग ही सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं और राहत कार्य शुरू कर देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा या हादसे के समय प्रशासन और समाज की साझेदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
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