मृतकों की पहचान चंबा के मेहल गांव निवासी चुनी लाल (65), देवी लाल (62), मोती राम सेवानिवृत्त भारतीय सैनिक (50), उनकी पत्नी बबली देवी (45), कुंता देवी (53), अनीता कुमारी (20) और चालक मनोहर लाल (34) निवासी टोपड़ा (चंबा) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, सभी काकड़ोथा गांव में आयोजित मुंडन संस्कार में गए थे। समारोह से लौटते समय रात को रास्ते में उनकी गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। देर रात हुए हादसे के बारे में किसी को भनक नहीं लगी और सारी रात सभी खाई में पड़े रहे। गुरुवार सुबह जब हादसे के बारे में पता चला, तब तक सभी की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से दो घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शव खाई से निकाले।
लोगों ने मानवीय चेन बनाकर स्ट्रेचर, तिरपाल, कंबल के सहारे शव सड़क तक पहुंचाए। मेडिकल कॉलेज चंबा में पोस्टमार्टम करवाने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंपे। हादसे के बाद गांव गम में डूब गया है। उधर, प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 15-15 हजार रुपये की फौरी राहत दी है। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हादसे में सात लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
देर रात हादसा कैसे हुआ, इसके बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। चंबा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार सकलानी ने बताया कि पुलिस कारणों का पता लगाने में जुटी है। हालांकि नींद की झपकी आना या फिर गाड़ी में तकनीकी खराबी हादसे का कारण हो सकता है।
पुखरी-मसरूंड मार्ग पर छतरूंड के समीप हुए हादसे ने सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जगह हादसा हुआ, वहां करीब दो किलोमीटर तक क्रैश बैरियर का नामोनिशान नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि हादसे के लिए सिर्फ मानवीय ही चूक नहीं, बल्कि सुरक्षा इंतजामों की कमी भी एक बड़ा कारण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्घटना स्थल पर स्टील के क्रैश बैरियर होते तो वाहन गहरी खाई में नहीं गिरता।