सिहुंता (चंबा)। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक सेवानिवृत्त कर्नल वाईएस राणा ने दुश्मनों से लोहा लेने की अपनी दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी साझा की। वह धर्मशाला के निवासी हैं और रविवार को सिहुंता में पूर्व सैनिकों के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने विजय दिवस के अवसर पर अपनी यात्रा और 1971 की जंग के दौरान की घटनाओं को याद किया।
कर्नल राणा ने बताया कि जब युद्ध शुरू हुआ तो उनकी ट्रेनिंग पूरी नहीं हुई थी और उनका प्रशिक्षण एक महीने के हिसाब से शेष था। वह अभी सिर्फ प्रशिक्षण के दौर से गुजर रहे थे लेकिन, इसी दौरान उन्हें सीधे युद्ध में भेज दिया गया। यह जंग 13 दिन तक चली और इसी बीच उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर पाकिस्तान से मुकाबला किया। युद्ध में सैनिकों का जोश इतना बढ़ा हुआ था कि यह जोश राणा और उनके जैसे अन्य सैनिकों में भी झलकने लगा और उन्होंने युद्ध में पूरी ताकत से भाग लिया।
कर्नल राणा ने कहा कि इस युद्ध में सेना के हर अधिकारी और सैनिक ने अपनी अहम भूमिका निभाई। वरिष्ठ सैनिकों को देखकर नए सैनिकों को भी साहस मिला और उन्होंने दुश्मन के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। उन्होंने युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि करीब 38 सैनिक इस जंग में शहीद हुए। कर्नल राणा ने यह भी कहा कि युद्ध के मैदान में एक बात हमेशा याद रखी जाती है कि कभी भी पीठ नहीं दिखानी चाहिए।
साथ ही, कर्नल राणा ने विजय दिवस पर होने वाले विशेष कार्यक्रम के बारे में भी बताया, जिसमें शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस बार विजय दिवस का आयोजन धर्मशाला में होगा, जहां पूर्व सैनिक एकजुट होकर इस विशेष दिन को मनाएंगे।