चंबा मेडिकल कॉलेज में बाजार से खरीदकर लानी पड़ रही बीटाडीन की दवा
टांका लगाने के लिए भी धागा तक नहीं है मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध
लोगों ने लचर व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज यूं तो छह लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करता है लेकिन इसमें दुर्घटना या चोटिल होने पर बीटाडीन और टांके के धागे तक उपलब्ध नहीं हैं।
मरीज और तीमारदार खुद ही दवा और सामग्री लेकर इलाज करवाने को मजबूर हैं। अस्पताल शिक्षा और सुविधाओं में तो सक्षम है लेकिन वास्तविक स्वास्थ्य सेवा में सुविधा शून्य है। स्थानीय लोग इसके संचालन पर सवाल उठा रहे हैं। उपचार करवाने आ रहे मरीज मेडिकल कॉलेज की लचर व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन जल्द बीटाडीन और टांके लगाने के लिए प्रयोग होने वाले धागा मंगवाने की बात कह रहा है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की स्थापना 2016-2017 में हुई थी। क्षेत्रीय अस्पताल को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किया गया। यह कॉलेज एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ और चिकित्सा सुविधाएं दे रहा है। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का आलम है। मेडिकल कॉलेज में दुर्घटना और हादसे में घायल होने वाले मरीजों के जख्म भरने के लिए बीटाडीन तक उपलब्ध नहीं हैं। मरीज का उपचार करवाने आ रहे लोगों को बाजार से बीटाडीन खरीदकर लानी पड़ रही है। दूसरी ओर, टांके लगाने के लिए धागा भी उपलब्ध नहीं है।
शहर के लोगों में डीके सोनी, रविंद्र सिंह किश्तवाड़िया, परमेश कुमार, योगराज और संजीव कुमार ने बताया कि जिले के पांच विस क्षेत्रों की पौने छह लाख आबादी के लिए खुले मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं पटरी से बार-बार उतर रही हैं। इसे सही से संचालित करने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और विभाग को उचित प्रयास करने चाहिए।
क्या है बीटाडीन
एक एंटीसेप्टिक (कीटाणुनाशक) दवा है जिसमें पोविडोन-आयोडीन सक्रिय तत्व होता है। यह घाव, कटी त्वचा, खरोंच और मामूली जलन में बैक्टीरिया को मारकर संक्रमण को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यह मलहम, लिक्विड और स्प्रे के रूप में आती है। केवल बाहरी त्वचा पर लगाने के लिए सुरक्षित है।
मामला ध्यान में आया है। जल्द बीटाडीन और टांके लगाने के लिए प्रयोग होने वाले धागा मंगवाया जाएगा।
- डॉ प्रदीप सिंह, एमएस, मेडिकल कॉलेज चंबा