छाती, सांस और हृदय रोगियों के लिए घातक हो सकता है जंगल से उठने वाला धुआं
चिकित्सकों ने ऐसे मरीजों को मुंह पर मास्क लगाकर बाहर निकलने का दिया परामर्श
वन संपदा व वन्य जीवों के बाद अब मनुष्य के लिए काल बनने लगी जंगल की आग
प्रवीण कुमार
चंबा। जंगलों में भड़की आग अब सिर्फ पेड़-पौधों और वन्य जीवों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका धुआं इंसानों की सांसों तक पहुंचने लगा है।
चंबा में चारों ओर फैली धुएं की परत ने वातावरण को इस कद्र ढक दिया है कि हृदय और छाती रोगियों के लिए यह स्थिति गंभीर खतरे का संकेत बन गई है। शहर और आसपास के क्षेत्र में चारों ओर आग का धुआं छाया है। हरे-भरे जंगल की हरियाली भी धुंधली नजर आ रही है। जो पहाड़ शहर से बिलकुल साफ दिखाई देते थे, उन्हें धुएं ने घेर रखा है। यह धुआं छाती, सांस और हृदय रोगियों के लिए घातक साबित हो सकता है। चिकित्सक ऐसे मरीजों को घर से निकलते समय मास्क पहनने का परामर्श दे रहे हैं। हृदय और छाती रोगियों को धुएं से प्रभावित स्थानों में जाने से बिलकुल परहेज करने की बात कही जा रही है।
जिले में सैकड़ों लोग हृदय, छाती और सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। वे नियमित रूप से दवाई भी खाते हैं। ऐसे मरीजों के लिए जंगल की आग का धुआं हानिकारक हो सकता है। जंगल की आग में पेड़-पौधों के साथ कई प्रकार की जड़ी-बूटियां भी जल रही हैं। इनमें कई स्वास्थ्य के लिए लाभदायक तो कई हानिकारक भी होती हैं। ऐसे में उनकी आग से निकलने वाला धुंआ भी हानिकारक हो सकता है।
मेडिसन विभाग के एचओडी एवं प्राचार्य डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि जंगल की आग का धुआं चारों तरफ फैला है। ऐसे वातावरण में घूमने से पहले छाती, हृदय और सांस के रोगियों को मास्क अवश्य पहनना चाहिए।
जंगलों में लगी आग के कारण पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इस संबंध में जल्द वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। - राहुल शर्मा, सहायक अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
जंगलों में भड़क रही आग से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि आग पर काबू पाया जा सके। शरारती तत्व जानबूझकर आग लगा रहे हैं। यदि लोग सहयोग दें तो ऐसे तत्वों को पकड़ा जा सकता है। - राकेश कुमार, मुख्य वन अरण्यपाल