सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। जिले के सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा विभाग घर-द्वार किताबें मुहैया करवाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए औपचारिकताएं शुरू कर दी है। कोविड-19 के खतरे के चलते ही शिक्षा विभाग ने ये निर्णय लिया है। स्कूली बच्चों को घर-द्वार किताबें मुहैया करवाने के लिए शिक्षा विभाग अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों, एसएमसी पदाधिकारियों की मदद लेगा।
इसके लिए बाकायदा शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर प्रयास भी शुरू दिए हैं। इतना ही नहीं, जिला प्रशासन भी शिक्षा विभाग कर हर संभव सहायता कर रहा है। विभाग के मुताबिक स्कूलों में किताबें लेने के लिए भीड़ एकत्रित हो सकती है। इससे कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
लिहाजा, शिक्षा विभाग ने अधिक से अधिक बच्चों को घर-द्वार किताबें मुहैया करवाने की योजना बनाई है। गौरतलब हो कि जिले के तहत 1190 प्राथमिक पाठशालाएं, 242 मिडल स्कूल, 84 हाई स्कूल और 152 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। ऐसे में ग्रीष्म और शीतकालीन स्कूलों में हजारों विद्यार्थी शामिल है।
कोविड-19 के खतरे को देेखते हुए यहां शासन-प्रशासन ने कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाते हुए स्कूलों को 3 मई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, अब शिक्षा विभाग के समक्ष सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताबें पहुंचाने की समस्या आ रही है।
इसके चलते बीते दिनों उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय चंबा में छह ब्लॉकों के बीपीईओ की बैठक बुलाई गई। इसमें निर्णय लिया गया कि ब्लॉक किताबों को डिपों से क्लस्टर के आधार पर उठाएंगे। इसमें सामाजिक दूरी को देखते हुए ही डिपुओं से किताबें ली जाए। इसके बाद संभव हो तो नजदीकी स्कूलों में एक-एक कक्षा के बच्चों को बुलाकर या घर-द्वार किताबे मुहैया करवाई जाएंगी।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र पॉल ने बताया कि स्कूली बच्चों को घर-द्वार किताबें पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। ड्ढसमें स्कूल प्रबंधन समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों की मदद ली जा सकती है।