जन सहयोग से नर्सरियों में तैयार किए जा रहे फलदार पौधे
10.60 क्विंटल चीड़ की पत्तियों को एकत्र कर जंगल में बनाए 171 चीड़ के चेक डैम
संवाद न्यूज एजेंसी
डलहौजी (चंबा)। कोई भी योजना या प्रयास जन सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता। इसे ध्यान में रखते हुए डलहौजी वन मंडल ने एक सराहनीय कार्य किया है, सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वनों में आग की घटनाओं को कम करने के प्रयास किए हैं, ताकि जैव विविधता में भी सुधार हो सके। डीएफओ रजनीश महाजन ने बताया कि वनों में आग की घटनाओं को कम करने के लिए ग्रामीण वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों के माध्यम से वृक्षारोपण करने वाले क्षेत्रों से चीड़ की पत्तियों को हटाया गया है। दो वर्षों में लगातार आग से जले हुए वन क्षेत्रों में विभिन्न देसी प्रजातियों के बीज बोए गए हैं। मंडल स्तर पर पिछले वर्ष 10.60 क्विंटल चीड़ की पत्तियों को एकत्र करके 171 चीड़ के चेक डैम बनाए। जिससे न केवल जंगल से उच्च ज्वलनशील चीड़ की पत्तियों का भार कम हो रहा है, बल्कि नालों को स्थिर करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद मिल रही है। ये सभी कार्य जन सहभागिता से किए गए हैं।
कहा कि जंगली फलदार पौधे भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों के लिए आय का मजबूत साधन बन सकते हैं। आर्थिक दृष्टि से लाभदायक अन्य फलदर पौधों की प्रजातियों में अखरोट, दारू, हरड़, बेहड़ा, आंवला और रीठा आदि शामिल हैं, जो इस क्षेत्र की मूल प्रजातियां हैं और इन्हें आजीविका के लिए गांव के साथ लगते जंगलों के किनारे इसी वर्ष वर्षा ऋतु के दौरान लगाया जाएगा। अग्निरोधी प्रजातियां जैसे कैंथ, खजूर, दाडू, फगुड़ा, अमलताश, टोर, फगुड़ा, त्रैंबल आदि प्रजातियां को भी नर्सरी में उगाया गया है, क्योंकि ये प्रजातियां चीड़ के जंगलों में भी समान रूप से जीवित रह सकती हैं।