मैहला ब्लॉक में बीडीसी चुनाव पर बवाल खड़ा हो गया है। चुनाव प्रक्रिया में नियमों को नजरअंदाज करने और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। उसके बाद प्रशासनिक तौर पर इस मामले की जांच के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि मामले में दोष साबित होने पर बीडीसी सदस्य की कुर्सी जा सकती है। साथ ही जांच के लपेटे में आने वाले अधिकारी भी फंस सकते हैं। इस संबंध में बुधवार को स्थानीय निवासी भगत राम ठाकुर ने अतिरिक्त दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
भगत राम ठाकुर ने बताया कि मैहला ब्लॉक के अधीन चुनाव लड़ने वाले बीडीसी सदस्य ने नामांकन के दौरान मांगे गए प्रमाणपत्र फर्जी बनाए थे। बीडीसी ने अपने प्रमाणपत्र में पूर्व में किसी भी तरह का देय बाकी न होने की बात कही है। जबकि पूर्व में बीडीसी सदस्य पंचायत में प्रधान था और उस दौरान उस पर कई आरोप लगे और पंचायती राज विभाग ने कार्य अनियमितता की वजह से रिकवरी भी डाली थी।
नामांकन दाखिल करते समय संबंधित अधिकारियों ने इनमें से किसी भी मामले को ध्यान में नहीं रखा। इस कारण आरोपी बीडीसी का चुनाव लड़ने और उसमें जीत दर्ज करने में कामयाब हो गया। भगत राम ठाकुर ने इस संबंध में निर्वाचन आयोग से भी मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किसी उच्च अधिकारी की देखरेख में मामले की जांच पूरी होनी चाहिए।
अतिरिक्त दंडाधिकारी चंबा शुभकरण सिंह ने भगत राम मामले की जांच गंभीरता से करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि मामले में कितनी सच्चाई है। प्रशासन इस मामले से जुड़े अधिकारियों की रिपोर्ट कार्ड का भी मुुआयना करेगा।