चंबा। जिले में मंगलवार को बैसाखी (बसोआ) पर्व मनाया गया। इस मौके पर दो साल बाद बेटियों ने अपने मायके पहुंचकर पिंदड़ी का स्वाद चखा। हर साल सूही माता मेले के समापन के बाद अगले दिन बसोआ पर्व मनाया जाता है।
चंबा शहर के लोग रानी सुनयना के बलिदान को याद कर बसोआ का पर्व मनाते हैं। इसके लिए मायका पक्ष से विवाहित बेटियों को सादा (निमंत्रण) भेजा जाता है। बेटियां अपने मायके पहुंचते हैं और त्योहार का प्रमुख व्यंजन पिंदड़ी का स्वाद चखती हैं। बेटी के मायके आने पर परिजन कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं और बेटियों को परोसते हैं। इनमें खास व्यंजन पिंदड़ी रहता है। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन घोषित था। ऐसे में बेटियां अपने मायके नहीं पहुंच पाई थी। लिहाजा, इस बार बेटियां बैसाखी के मौके पर अपने मायके पहुंचीं।
ऐसे बनती है पिंदड़ी
पिंदड़ी बनाने के लिए गेहूं और कोदरा के आटे को हल्की आंच पर पकाने के बाद छाछ से गूंथा जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी गोल पिनियां बनाई जाती हैं। इसके बाद हरे पत्तों में रखकर टोकरी में रखा जाता है, जिसे अगले दिन परोसा जाता है।