सीमा की उपलब्धि पर विद्यार्थियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। इसके बाद पुखरी बस स्टैंड पहुंचने पर स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ सीमा का स्वागत किया। लोगों ने उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। ईसीसी क्रिकेट क्लब पुखरी की ओर से भी सीमा को फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया। क्लब सदस्यों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी का सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। मसरूंड बस स्टैंड पर भी सीमा के पहुंचते ही लोगों ने उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने फूल बरसाकर और मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।
लोगों ने कहा कि सीमा ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर चंबा की खेल प्रतिभा को देश-दुनिया में पहचान दिलाई है। इसके बाद सीमा के रेटा स्थित घर पहुंचने पर परिवार और स्थानीय लोगों ने फूलों से उनका स्वागत किया। लंबे समय बाद घर लौटीं सीमा के चेहरे पर अपनों से मिलने की खुशी साफ झलक रही थी। सीमा की इस उपलब्धि ने चंबा के युवाओं में नई उम्मीद और जोश पैदा किया है। लोगों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराना युवाओं के लिए प्रेरणा है। स्वागत समारोहों में लोगों ने सीमा के उज्ज्वल भविष्य और आगामी ओलंपिक में सफलता की कामना की। घर पर देररात तक डीजे की धुनों पर सीमा, मां, भाई परिजन और अन्य थिरकते नजर आए।
बेटी के भावुक अंदाज को देखकर मां की आंखें भी नम
अपने पैतृक गांव रेटा पहुंचने पर चंबा की उड़नपरी सीमा ने सबसे पहले अपनी मां का आशीर्वाद लिया। उपलब्धि की खुशी में सीमा ने अपना पदक, शॉल, टोपी और फूलों के हार मां को पहना दिए। बेटी के इस भावुक अंदाज को देखकर मां की आंखें भी नम हो गईं। परिवार और ग्रामीणों ने इस पल को गर्व और खुशी से देखा। बेटी ने कहा कि उसकी सफलता के पीछे मां के त्याग, संघर्ष और आशीर्वाद की सबसे बड़ी भूमिका है। इसलिए गांव पहुंचते ही उसने अपनी उपलब्धि मां को समर्पित की। मां ने बेटी को गले लगाकर उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। इस दौरान गांव में खुशी का माहौल रहा। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने बेटी की उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।